Monday, April 10, 2017

One should not worry about his destiny or what will happen in his lifetime, because what is ordain will happen anyways...We should strive to do devotional service to purify our minds so that we can be happy in any kind of condition of life...A mayik mind keeps us running after worldly joys and in the end the ultimate result is birth and death and a pure mind will desire higher taste and attain the kingdom of God...Every day of our life we should make special effort to bathe the mind the the realm of God always remembering that He give us this human body to know and love Him.
Radhey- Radhey.

जब आज को कल पर टालते ही रहोगे तो उम्र चाहे जितनी हो कभी भगवत भजन प्रारम्भ नही कर सकोगे। बुढापे मे तो अपना शरीर ही सम्भालना मुश्किल हो जाता है। भजन एवं सेवा क्या करोगे ? अगर तुम्हारा भगवतप्राप्ति, भगवत प्रेम ही लक्ष्य है तो फिर देर किस बात की? किसका इन्तजार है? करुणानिधि के समक्ष दीन बनकर एक बार केवल एक बार सच्चे हृदय से कहकर तो देखो। वे सब कुछ दे देंगे।
--- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

मिलत नहिं नर तनु बारम्बार |
कबहुँक करि करुणा करुणाकर, दे नृदेह संसार |
उलटो टाँगि बाँधि मुख गर्भहिं, समुझायेहु जग सार |
दीन ज्ञान जब कीन प्रतिज्ञा, भजिहौं नंदकुमार |
भूलि गयो सो दशा भई पुनि, ज्यों रहि गर्भ मझार |
यह ‘कृपालु’ नर तनु सुरदुर्लभ, सुमिरु श्याम सरकार ||

भावार्थ – यह मनुष्य का शरीर बार – बार नहीं मिलता | दयामय भगवान् चौरासी लाख योनियों में भटकने के पश्चात् दया करके कभी मानव देह प्रदान करते हैं | मानव देह देने के पूर्व ही संसार के वास्तविक स्वरूप का परिचय कराने के लिए गर्भ में उल्टा टाँग कर मुख तक बाँध देते हैं | जब गर्भ में बालक के लिए कष्ट असह्य हो जाता है तब उसे ज्ञान देते हैं और वह प्रतिज्ञा करता है कि मुझे गर्भ से बाहर निकाल दीजिये, मैं केवल आपका ही भजन करूँगा | जन्म के पश्चात् जो श्यामसुन्दर को भूल जाता है, उसकी वर्तमान जीवन में भी गर्भस्थ अवस्था के समान ही दयनीय दशा हो जाती है | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि यह मानव देह देवताओं के लिये भी दुर्लभ है, इसीलिये सावधान हो कर श्यामसुन्दर का स्मरण करो |
( प्रेम रस मदिरा सिद्धान्त – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति
Shri Maharaj ji's Golden words:
Not even 6 people out of 6 Billion People in this world know what Sin (पाप) is. The time we spend in Remembering Lord KRISHNA and the time we spend in association with Mahapurush (Guru) is the Only Time we Do not commit Sin(पाप). All the remaining time we commit Sin (पाप) Only.

कबीर जी कहते हैं:-
तीन लोक नौ खंड में गुरु से बड़ा न कोय।
करता करे न करि सके,गुरु करे सो होये।।

यदि परमात्मा करना भी चाहे, तो भी न कर पाये। लेकिन गुरु चाहे तो हो जाये। इस वाक्य को पढ़कर आप सोचते होंगे कि ऐसा क्या? कबीर जी ने गुरु को परमात्मा से ऊपर बता दिया ये तो अतिशयोक्ति करते मालूम पड़ते हैं। जी नहीं, ध्यान से विचार करें। कबीर कह रहें हैं कि मार्ग के बिना तुम मंजिल पर पहुँच नहीं सकते। मंज़िल तो एक छोर है, उस छोर तक पहुचने के लिये मार्ग नहीं होगा तो पहुचोंगे कैसे? यानि मार्ग के बिना मंज़िल मिल नहीं सकती तो बताओ मार्ग बड़ा या मंज़िल? क्योंकि मार्ग पर चल दिये तो निश्चित ही एक दिन मंज़िल पर पहुँचोगे।
यानि परमात्मा मंज़िल है तो वो कुछ करना भी चाहे तो कर नहीं सकता काम। 'गुरु रूपी' मार्ग ही है, उसी के द्वारा मंज़िल मिलेगी। बस हमें ठीक से समझना होगा।

माय ! अस गुड़िया मोहिं बनाय |
जाकी निरखि सुघर सुंदरता, गुड़रा जिय ललचाय |
भूषन – वसन पिन्हाउ वाय अस, जस कहुँ सखिन न पाय |
पुनि बनाउ अस सुंदर गुड़रा, लखि गुड़िया मनभाय |
नख शिख करि श्रृंगार दुहुँन सिर, सेहरा देउ बँधाय |
कह ‘कृपालु’ तब कुंवरि सखिन लै, दोउन ब्यावहु कराय ||

भावार्थ – छोटी सी किशोरी जी कीर्ति मैया से कहती हैं – “ मैया ! मुझे ऐसी बढ़िया गुड़िया बना दे जिसकी सुन्दरता देख कर गुड्डे का मन ललचा जाय | और मैया ! इस गुड़िया को ऐसे कपड़े एवं गहने पहिना दे जो सखियों को कहीं न मिलें | फिर मैया गुड्डा भी इतना ही सुन्दर बना दे कि उसे देखकर गुड़िया का मन ललचा जाय | दोनों का नख से शिख तक सुन्दर श्रृंगार करके, दोनों को सेहरा बाँध दे |” ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं – “हाँ मैया ! ऐसा कर दे, तब हमारी छोटी – सी किशोरी जी सखियों को लेकर गुड़िया – गुड्डा का ब्याह रचायेंगी |”
( प्रेम रस मदिरा श्री राधा – बाल लीला – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति

नींद जो है वो तमोगुण है। जाग्रत अवस्था में हम सत्वगुण में जा सकते हैं,रजोगुण में भी जा सकते हैं। लेकिन नींद जो है वो प्योर(pure) तमोगुण है। बहुत ही हानिकारक है। अगर लिमिट से अधिक सोओ तो भी शारीरिक हानी होती है। आपके शरीर के जो पार्ट्स हैं उनको खराब करेगा वो अधिक सोना भी। रेस्ट की भी लिमिट है। रेस्ट के बाद व्यायाम आवश्यक है। देखिये शरीर ऐसा बनाया गया है कि इसमें दोनों आवश्यक हैं। तुम्हें संसार में कोई जरूरी काम आ जाए,या कोई तुम्हारा प्रिय मिले तब नींद नहीं आती। इसलिए कोई फ़िज़िकल रीज़न नहीं कारण केवल मानसिक वीकनेस है। लापरवाही,काम न होना,नींद आने का प्रमुख कारण है। हर क्षण यही सोचो की अगला क्षण मिले न मिले अतएव भगवद विषय में उधार न करो।
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...