Friday, July 14, 2017

सकल धर्म को मूल हैं , एक कृष्ण भगवान्।
मूल तजे सब शूल हैं , कर्म , योग अरु ज्ञान।।६५।।

भावार्थ - समस्त धर्मों का मूलाधार श्रीकृष्ण ही हैं। शेष सब शाखा , उपशाखा , पत्र , पुष्पादि के समान हैं यदि मूल काट दिया जाय तो शेष सब ढह जायेंगे।
भक्ति शतक (दोहा - 65)
----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
(सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति)

Sunday, May 28, 2017

The stronger your decision that God alone is mine, the more intense will be your desire to meet Him. The more intense your desire, the deeper will be your resolve to do the things that take you closer to Him. The deeper your resolve, the harder you will try. The harder you try, the more grace you will attract and the closer you will come to Him.
.....SHRI MAHARAJJI.

हे प्राणेश्वर ! कुंजबिहारी श्रीकृष्ण ! तुम ही मेरे जीवन सर्वस्व हो । हमारा – तुम्हारा यह सम्बन्ध सदा से है एवं सदा रहेगा ( अज्ञानतावश मैं इस सम्बन्ध को भूल गयी ) । तुम चाहे मेरा आलिंगन करके मुझे अपने गले से लगाते हुए, मेरी अनादि काल की इच्छा पूर्ण करो, चाहे उदासीन बनकर मुझे तड़पाते रहो, चाहे पैरों से ठोकर मार – मारकर मेरा सर्वथा परित्याग कर दो। प्राणेश्वर ! तुम्हें जिस – जिस प्रकार से भी सुख मिले, वही करो मैं तुम्हारी हर इच्छा में प्रसन्न रहूंगी । ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि निष्काम प्रेम का स्वरूप ही यही है कि अपनी इच्छाओं को न देखते हुए, प्रियतम की प्रसन्नता में ही प्रसन्न रहा जाय । अपने स्वार्थ के लिए प्रियतम से बदला पाने की भावना से प्रेम करना व्यवहार जगत का नाटकीय व्यापार – सा ही है।
--- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
भगवान् संसार में सर्वत्र व्याप्त है," हरि व्यापक सर्वत्र समाना "
लेकिन न हमें भगवान् दिखाई देता है, न उसके शब्द सुनाई देते हैं, अर्थात् हमें संसार में भगवान् का किसी भी प्रकार का अनुभव नहीं होता। हमारी इन्द्रियाँ अर्थात् आँख, कान, नाक, त्वचा, रसना, हमारा मन और हमारी बुद्धि ये सब मायिक हैं और इन्हीं इन्द्रिय, मन, बुद्धि द्वारा हम संसार की प्रत्येक वस्तु का अनुभव करते हैं, लेकिन भगवान् माया से परे दिव्य है, उसे इन इन्द्रिय, मन, बुद्धि द्वारा ग्रहण नहीं किया जा सकता। भगवान् जब हमारी इन्द्रिय, मन, बुद्धि को शक्ति प्रदान करते हैं, तब ये सब अपना-अपना कर्म करते हैं, अन्यथा तो ये सब जड़ हैं, अतः माया से बने इन्द्रिय, मन, बुद्धि के द्वारा दिव्य भगवान् का अनुभव होना असम्भव है। जब इन्द्रिय, मन, बुद्धि दिव्य हो जायेंगे, तभी संसार में सर्वत्र व्याप्त भगवान् का अनुभव किया जा सकता है, जैसे गोपियाँ सर्वत्र श्रीकृष्ण का दर्शन करती थीं- जित देखूँ तित श्याममयी है।
-----जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।

"हे श्यामसुंदर! संसार में भटकते भटकते थक गया। हे करुणा वरूनालय! तुमने अकारण करुणा के परिणाम स्वरूप मानव देह दिया ,गुरु के द्वारा तत्वज्ञान कराया कि किसी तरह तुम्हारे सन्मुख हो जाऊँ तथा अनंत दिव्यानन्द प्राप्त करके सदा सदा के लिए मेरी दुख निव्रत्ति हो जाये लेकिन यह मन इतना हठी है कि तुम्हारे शरणागत नहीं होता।"
--- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

Saturday, May 13, 2017

https://www.facebook.com/sharadgupta1008/videos/1315828761799213/

सुश्री श्रीधरी दीदी द्वारा 15 दिवसीय विलक्षण दार्शनिक प्रवचन श्रृंखला के सांतवें दिन के प्रवचन का सीधा प्रसारण। Date: 13th May 2017.

प्रिय मित्रों...!!! जय श्री राधे।
Facebook पर जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा प्रदत्त दिव्य तत्त्वज्ञान के प्रचार-प्रसार हेतु बनाये गये आपके अपने सबसे प्रिय ग्रुप में जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रचारिका सुश्री श्रीधरी दीदी द्वारा विलक्षण दार्शनिक प्रवचन एवं दिव्य रसमय संकीर्तन का सीधा प्रसारण देख रहे आप सभी श्री हरिगुरु चरणानुरागी सहृदय भक्तों का हार्दिक स्वागत है।
सत्संग प्रेमी महानुभाव !
इस विकराल कलिकाल में अनेक अज्ञानी असंतो द्वारा ईश्वरप्राप्ति के अनेक मनगढ़ंत मार्गों, अनेकानेक साधनाओं का निरूपण सुनकर भोले भाले मनुष्य कोरे कर्मकाण्डादि में प्रवृत्त होकर भ्रान्त हो रहे हैं एवं अपने परम चरम लक्ष्य से और दूर होते जा रहे हैं।
ऐसे में विविध दर्शनों के विमर्श से अनिश्चय के कारण, व्याकुल एवं भटके हुये भवरोगियों के लिए पंचम मूल जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज के प्रवचन अमृत औषधि के समान हैं।
अपने सद्गुरुदेव के कृपा प्रसाद से ही उनकी विदुषी प्रचारिका सुश्री श्रीधरी जी उनके समस्त शास्त्रों, वेदों एवं अन्यान्य धर्मग्रन्थों के सार स्वरूप विलक्षण दार्शनिक सिद्धान्त "कृपालु भक्तियोग तत्वदर्शन" को अपने ओजस्वी धारावाहिक प्रवचनों के माध्यम से जन-जन में प्रचारित करते हुये जीवों को श्री राधाकृष्ण की निष्काम भक्ति की ओर प्रेरित कर रही हैं।
इसी श्रंखला में उनके 15 दिवसीय दिव्य प्रवचन का आयोजन सिद्धेश्वर महादेव मंदिर ,सिंह भूमि -सी ,खातीपुरा , जयपुर में किया गया है। इस प्रवचन श्रंखला का समय दिनाँक 7 मई से 21 मई तक प्रतिदिन सायं 7:00 से 8:30 बजे तक रहेगा।
इस युग के परमाचार्य जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा विरचित अद्वितीय संकीर्तन भक्त हृदय के लिए संजीवनी बूटी के समान हैं। उन्हीं अनुपमेय संकीर्तनों के माध्यम से वे प्रवचन के साथ ही कर्मयोग की क्रियात्मक साधना का अभ्यास भी करायेंगी।
अतएव यह एक ऐसा दुर्लभ अवसर है जो आपकी आत्मा को तृप्ति प्रदान करेगा। वेद-शास्त्र सम्मत सार्वभौमिक सिद्धान्त ज्ञान के साथ ही कलि के सर्वश्रेष्ठ धर्म संकीर्तन द्वारा भक्तजन ब्रजरस का भी आस्वादन कर सकेंगे।
सुश्री श्रीधरी जी के संस्कृत उच्चारण की बड़े से बड़े विद्वान भी प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकते। गुरु कृपा से समस्त वेद-शास्त्रों के गूढ़तम सिद्धांतों को भी सरल सरस रूप में प्रस्तुत करना इनके प्रवचन की विशेषता है। इनके दिव्य ज्ञान से युक्त प्रवचन सभी आध्यात्मिक शंकाओं एवं समस्त धर्मग्रन्थों व आचार्यों के सिद्धांतों में परस्पर पाये जाने वाले विरोधाभासों का समन्वय करते हुये भगवत्प्राप्ति का अत्यंत सीधा सरल मार्ग प्रशस्त करते हैं।
वे इस धारावाहिक प्रवचन श्रंखला में समस्त शास्त्रीय प्रमाणों, तर्कों एवं दैनिक उदाहरणों द्वारा जीव का स्वरूप एवं लक्ष्य, भगवान से जीव का संबंध, मानव देह का महत्व एवं क्षणभंगुरता, भगवत्कृपा, शरणागति, वैराग्य एवं संसार का स्वरूप, गुरुतत्व, रूपध्यान, कर्मयोग, ज्ञानयोग इत्यादि विषयों पर प्रकाश डालते हुये भक्तियोग की उपादेयता सिद्ध करके शीघ्रातिशीघ्र लक्ष्य दिलाने वाली साधना का निरूपण करेंगी।
वे कठिन से कठिन विषयों की व्याख्या भी इतनी सरलता से करती हैं कि एक भोले भाले अंगूठा छाप को भी समझने में कठिनाई नहीं होती। इनका प्रवचन वेद, गीता, रामायण, भागवत, बाइबिल, कुरान आदि समस्त धर्मग्रन्थों के प्रमाणों से युक्त होता है।
"कृपालु भक्तियोग तत्वदर्शन" पर आधारित इनके रसमयी प्रवचन एवं मधुर संकीर्तन जिज्ञासुओं के जीवन को, उनकी विचारधारा को पूर्ण सात्विक एवं भगवदमयी बना देते हैं।
यह देव दुर्लभ मानव देह सद्गुरु की शरणागति में भगवत्प्राप्ति के लिए ही भगवान ने अपनी अकारण करुणा से हमें प्रदान किया है लेकिन परलोक में सद्गति प्राप्त करने के लिए हमने अब तक कोई तैयारी नहीं की। हमारे हठी एवं अहंकारी मन ने जीवन की इस गोधूलि बेला में भी भीषण तम परिपूर्ण पथ पर चलते हुए कभी उस और दृष्टिपात नहीं किया जहां दिव्य ज्ञान ,दिव्य प्रेम एवं दिव्य आनंद की वर्षा हो रही है। वेदों के अनुसार केवल वास्तविक गुरु के पावन सानिध्य एवं शरणागति से ही जीव का अज्ञान अंधकार समाप्त हो सकेगा एवं जीव भगवतप्राप्ति की और अग्रसर हो सकेगा। इसी तथ्य को मस्तिक्ष में रखते हुए ही इस प्रवचन का आयोजन किया गया है। ये दिव्य प्रवचन श्रवण एक ऐसा दुर्लभ अवसर है जो आपकी आत्मा को तृप्ति प्रदान करेगा। इस प्रवचन का प्रारूप किसी भी प्रकार के आडंबर से रहित है।
वेद कहता है :- "उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत"
अरे मनुष्यों ! उठो, जागो और शीघ्र ही महापुरुषों की शरण में जाकर परतत्व का ज्ञान प्राप्त कर अपने परम चरम लक्ष्य आनंद को प्राप्त करो। पता नहीं इस क्षणभंगुर जीवन का अगला क्षण तुमको मिले न मिले, इसलिए देर न करो।

नोट: इस सत्संग कार्यक्रम का सीधा प्रसारण Facebook Live Broadcast के माध्यम से आपके अपने इसी सबसे प्रिय Facebook ग्रुप (https://www.facebook.com/groups/361497357281832/) में किया जा रहा है। एवं साथ-साथ ही जो भी हमारे द्वारा संचालित अन्य FbGroups/Fb Pages/Twitter/GooglePlus Account/Instagram/एवं हमारे Profiles हैं उनपर भी सभी जग़ह Share किया गया है। इस स्वर्णिम अवसर का लाभ अवश्य उठायें। जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज के दिव्य सिद्धांत को स्वयं भी बारंबार सुनिये,औरों को भी सुनाइये,ख़ुद भी जुड़िये औरों को भी जोड़िये। इस सेवा में सभी का कल्याण निहित है।
आप सभी सीधा प्रसारण देखने वाले साधकों से निवेदन है कि कृपया धैर्यपूर्वक आदि से अंत तक पूरा कार्यक्रम देखें एवं लाभ लें। एवं इस Video को अधिक से अधिक अपने मित्रों के एवं स्वयं के Profiles पर Share करें। Technically डेढ़ से दो घंटे का Live Video कभी-कभी एक ही बार में सीधा प्रसारित करना संभव नहीं हो पाता है इसलिए वीडियो दो से तीन भागों में भी प्रसारित किया जा सकता है,इससे आपको बस एक दो मिनट का Disturbance हो सकता है,एक या दो Minute का Matter miss हो सकता है,बाकि तो आप सभी Parts(भाग) देखेंगे तो प्रवचन का Continuation में ही लाभ ले सकेंगे। ये Video आप बाद में भी अपनी सुविधानुसार देख सकते हैं क्योंकि ये Save रहता है। इसलिए जिसकी जैसी सुविधा हो वो अवश्य लाभ ले। अब तक के 6 दिनों के प्रवचन भी आप ग्रुप में देख सकते हैं। इस स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाइए एवं अपनी समस्त आध्यात्मिक शंकाओं का निवारण कीजिये।

जय श्री राधे।
https://www.facebook.com/sharadgupta1008/videos/1315828761799213/

Saturday, May 6, 2017

मेरे प्रिय साधक!
भगवान एवं गुरु सदा सर्वदा हैं ऐसा ही मानो। लीला संवरण की बात कभी न सोचो।
मैं सदा शरणागत के पास रहूँगा।

'कृपालु'

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...