This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Friday, July 14, 2017
श्री राधे जू को, अधाधुंध दरबार |
जिन वनचरिन आचरन कुत्सित, जग जेहि कह ब्यभिचार |
तिन कहँ निज सहचरि करि हरि सों, करवावति मनुहार |
जेहि रासहिं तरसति ‘कमला’ सी, तप करि – करि गइ हार |
तेहि वनचरिहिं सखिन किय रासहिं, को अस सरल उदार |
कह ‘कृपालु’ यह जानि गहहु मन ! शरण गौर सरकार ||
जिन वनचरिन आचरन कुत्सित, जग जेहि कह ब्यभिचार |
तिन कहँ निज सहचरि करि हरि सों, करवावति मनुहार |
जेहि रासहिं तरसति ‘कमला’ सी, तप करि – करि गइ हार |
तेहि वनचरिहिं सखिन किय रासहिं, को अस सरल उदार |
कह ‘कृपालु’ यह जानि गहहु मन ! शरण गौर सरकार ||
भावार्थ – श्री किशोरी जी के दरबार में छप्पर – फाड़ कृपा होती है |
जिन वनचारियों का आचरण निन्दनीय था, संसार जिसे व्यभिचार की संज्ञा देता है
( पूर्णतम पुरुषोत्तम ब्रह्म श्रीकृष्ण को उस रूप में न जानते हुए भी पर –
पुरुष मानकर ही अनन्य – प्रेम किया | जिस प्रकार औषधि अनजाने में भी पूर्ण
लाभ देती है, उसी प्रकार गोपियों को भी भगवल्लाभ हुआ ) किशोरी जी ने उन
वनचरियों को अपनी सहचरी बनाया एवं ब्रह्म श्याम से भी उनकी खुशामद करवायी |
जिस महारास में युगों तप करने पर भी महालक्ष्मी सरीखी प्रवेश तक नहीं पा
सकीं, उसी रास में किशोरी जी ने उन वनचरियों को अपनी प्राणसखी बनाकर अपनी
अद्वितीय उदारता का परिचय दिया | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं – अरे मन ! ऐसे
उदार दरबार के रहस्य को जानकर अलबेली सरकार के युगल – चरणों की शरण ग्रहण
कर |
( प्रेम रस मदिरा श्रीराधा – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति
( प्रेम रस मदिरा श्रीराधा – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति
कोई
महापुरुष हो , चाहे राक्षस हो। अपने मन में दूसरे के प्रति हमेशा अच्छी
भावना होनी चाहिये। जिससे अच्छे विचार अंतःकरण में आवें। वो जो है, वो तो
रहेगा ही। वो राक्षस होगा, तो राक्षस रहेगा। महापुरुष होगा तो महापुरुष
रहेगा। हम अपने अंदर अगर दुर्भावना लाते हैं तो हमने तो अपना अंतःकरण
बिगाड़ लिया। अब भगवान् जो थोड़ा पैर रखे आने के लिए, एबाउट टर्न चल दिये।
वो कहते हैं - क्योंकि तुम तो औरों को बुलाते हो , इसलिये मैं नहीं रहता
ऐसे घर में।
!! जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज !!
!! जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज !!
भगवान
का बल निरन्तर हमारे पास रहने पर भी सक्रिय नहीं होता, इसका कारण है कि हम
उसे स्वीकार नहीं करते। जब भी हम भगवान् के बल का अनुभव करने लगेंगे, तभी
वह बल सक्रिय हो जायेगा और हम निहाल हो जाएंगे।
हमारी भोगों में सुख की आस्था इतनी दृढ़मूल हो रही है कि वैराग्य के शब्दों से वह दूर नहीं होती। किसी महान विपत्ति का प्रहार तथा भगवान् अथवा उनके किसी प्रेमीजन महापुरुष की कृपा ही इस आस्था को दूर कर सकते हैं।
शरणागत वही हो पाता है, जो दीन है। जिसे अपनी बुद्धि, सामर्थ्य, योग्यता का अभिमान है, वह किसी के शरणागत क्यों होना चाहेगा। जब अपना सारा बल, बलों की आशा - भरोसा टूट जाते हैं, तब वह भगवान् की और ताकता है और उनका आश्रय चाहता है।
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
हमारी भोगों में सुख की आस्था इतनी दृढ़मूल हो रही है कि वैराग्य के शब्दों से वह दूर नहीं होती। किसी महान विपत्ति का प्रहार तथा भगवान् अथवा उनके किसी प्रेमीजन महापुरुष की कृपा ही इस आस्था को दूर कर सकते हैं।
शरणागत वही हो पाता है, जो दीन है। जिसे अपनी बुद्धि, सामर्थ्य, योग्यता का अभिमान है, वह किसी के शरणागत क्यों होना चाहेगा। जब अपना सारा बल, बलों की आशा - भरोसा टूट जाते हैं, तब वह भगवान् की और ताकता है और उनका आश्रय चाहता है।
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
"हे
श्यामसुंदर! संसार में भटकते भटकते थक गया। हे करुणा वरूनालय! तुमने अकारण
करुणा के परिणाम स्वरूप मानव देह दिया ,गुरु के द्वारा तत्वज्ञान कराया कि
किसी तरह तुम्हारे सन्मुख हो जाऊँ तथा अनंत दिव्यानन्द प्राप्त करके सदा
सदा के लिए मेरी दुख निव्रत्ति हो जाये लेकिन यह मन इतना हठी है कि
तुम्हारे शरणागत नहीं होता।"
--- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
--- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
नींद
जो है वो तमोगुण है। जाग्रत अवस्था में हम सत्वगुण में जा सकते हैं,रजोगुण
में भी जा सकते हैं। लेकिन नींद जो है वो प्योर(pure) तमोगुण है। बहुत ही
हानिकारक है। अगर लिमिट से अधिक सोओ तो भी शारीरिक हानी होती है। आपके शरीर
के जो पार्ट्स हैं उनको खराब करेगा वो अधिक सोना भी। रेस्ट की भी लिमिट
है। रेस्ट के बाद व्यायाम आवश्यक है। देखिये शरीर ऐसा बनाया गया है कि
इसमें दोनों आवश्यक हैं। तुम्हें संसार में कोई जरूरी काम आ जाए,या कोई
तुम्हारा प्रिय मिले तब नींद नहीं आती। इसलिए कोई फ़िज़िकल रीज़न नहीं कारण
केवल मानसिक वीकनेस है। लापरवाही,काम न होना,नींद आने का प्रमुख कारण है।
हर क्षण यही सोचो की अगला क्षण मिले न मिले अतएव भगवद विषय में उधार न करो।
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
The
Guru imparts spiritual knowledge, removes the darkness of ignorance and
guides you towards the attainment of your supreme goal. Living in the
association of a Saint for some time, if you find yourself more deeply
attached to God and detached from the world, this is the surest proof
that he is a God-realised soul. You could never have imagined giving so
much time to devotion of God. It was only made possible due to the grace
of your Guru. You should always realise the grace of your Guru to be
instrumental in your spiritual progress.
--------JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
--------JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
Subscribe to:
Posts (Atom)
मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...
-
Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
-
गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
-
ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






