This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Saturday, December 2, 2017
श्याम हौं कब ब्रज बसिहौं जाय |
श्यामा श्याम नाम गुन गावत, कब नैनन झरि लाय |
कब विचरौं गह्वर वन वीथिन, राधे राधे गाय |
कब झूमत वृंदावन - कुंजनि, फिरौं हिये हुलसाय |
कब लपटाय लतन गोवर्धन, कहौं हाय पिय हाय |
कब लोटत ‘कृपालु’ ब्रज रज बिच, हौं जैहौं बौराय ||
श्यामा श्याम नाम गुन गावत, कब नैनन झरि लाय |
कब विचरौं गह्वर वन वीथिन, राधे राधे गाय |
कब झूमत वृंदावन - कुंजनि, फिरौं हिये हुलसाय |
कब लपटाय लतन गोवर्धन, कहौं हाय पिय हाय |
कब लोटत ‘कृपालु’ ब्रज रज बिच, हौं जैहौं बौराय ||
भावार्थ - हे श्यामसुन्दर ! वह दिन कब आयेगा जब मैं सदा के लिए ब्रज
में ही जाकर निवास करूँगा | कब राधा - कृष्ण के विविध नाम एवं गुण गाते हुए
मेरी आँखों से निरंतर अश्रु प्रवाह होगा | कब गह्वरवन की गलियों में
प्रेमपूर्वक ‘राधे, राधे’ पुकारते हुए विचरण करूँगा | कब वृन्दावन के
कुंजों में उल्लास भरे भावों से झूमते हुए फिरूँगा | कब गोवर्धन की लताओं
का आलिंगन करके, अत्यन्त अधीर होकर तुम्हारे मधुर - मिलन की आकांक्षा में
‘हाय ! पिय हाय !!’ ऐसा कहूँगा | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि कब ब्रज की
धूल में लोटते हुए मैं प्रियतम के प्रेम में विभोर होकर वास्तविक पागल बन
जाऊँगा |
( प्रेम रस मदिरा दैन्य - माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति
( प्रेम रस मदिरा दैन्य - माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति
In
this world, there are few fortunate ones, who move towards God. Amongst
them, only a few are fortunate enough to get the association of a
genuine Saint. Amongst them too, there are a few who are fortunate
enough to get the Divine knowledge. Nevertheless, there is one flaw,
which does not let them progress. It is their habit of procrastination.
When it comes to worldly activities, we do these immediately. We never
defer activities like attaching our minds somewhere, or showing
aversion somewhere, or insulting someone, or causing damage to someone.
We do these instantly. But we always postpone God related activities.
Vedas say – "Don’t leave anything for tomorrow. Who knows, tomorrow may
not come in your life". So, do not procrastinate even for a moment.
Start practicing devotion right from this moment.
.............Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj.
एक साधक का प्रश्न - शरणागति का क्या अर्थ है ?
श्री महाराजजी द्वारा उत्तर - हमें भगवान् की शरणागति करनी है शरणागति का मतलब है कुछ न करना लेकिन अनादिकाल से हम सब कुछ करने के अभ्यस्त है ― इसलिये कुछ न करने की अवस्था पर आने के लिये हमे बहुत कुछ करना है इसी का नाम 'साधना' है । जो भगवान् का दर्शन आदि मिलता है वह सब उसी की शक्ति ही से मिलता है ।
श्री महाराजजी द्वारा उत्तर - हमें भगवान् की शरणागति करनी है शरणागति का मतलब है कुछ न करना लेकिन अनादिकाल से हम सब कुछ करने के अभ्यस्त है ― इसलिये कुछ न करने की अवस्था पर आने के लिये हमे बहुत कुछ करना है इसी का नाम 'साधना' है । जो भगवान् का दर्शन आदि मिलता है वह सब उसी की शक्ति ही से मिलता है ।
वेदाहमेतं पुरुषं महान्त्मादित्यवर्ण तमसः परस्तात्।
( श्वेता. ३-८ )
इसका रहस्य यह है कि श्रीकृष्ण की बुद्धि से ही श्रीकृष्ण को जाना जा सकता है और वह बुद्धि तभी प्राप्त होगी जब जीव श्रीकृष्ण के शरणापन्न होगा । इसी भाव से गीता कहती है । यथा -
( श्वेता. ३-८ )
इसका रहस्य यह है कि श्रीकृष्ण की बुद्धि से ही श्रीकृष्ण को जाना जा सकता है और वह बुद्धि तभी प्राप्त होगी जब जीव श्रीकृष्ण के शरणापन्न होगा । इसी भाव से गीता कहती है । यथा -
ददामि बुद्धियोगं तं येन मामु प्यान्ति ते ।।
( गीता १०-१० )
अतः हे बुद्धि देवी ! तुम श्रीकृष्ण की शरण चली जाओ बस - तुम्हारा काम बन जायगा ।
श्रीकृष्ण चरणों में बुद्धि समर्पित करने के पश्चात ही वे अकारण करुण श्रीकृष्ण अपनी कृपा द्वारा दिव्य बुद्धि प्रदान करे देंगे तभी हम उस श्रीकृष्ण बुद्धि से श्रीकृष्ण को जान सकेंगे ।
---- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
( गीता १०-१० )
अतः हे बुद्धि देवी ! तुम श्रीकृष्ण की शरण चली जाओ बस - तुम्हारा काम बन जायगा ।
श्रीकृष्ण चरणों में बुद्धि समर्पित करने के पश्चात ही वे अकारण करुण श्रीकृष्ण अपनी कृपा द्वारा दिव्य बुद्धि प्रदान करे देंगे तभी हम उस श्रीकृष्ण बुद्धि से श्रीकृष्ण को जान सकेंगे ।
---- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
श्री महाराजजी से प्रश्न:
जो संसार में रहने वाला अविवाहित व्यक्ति साधना करने चलता है ,उसके लिए विवाह करना कहाँ तक सही या गलत है?
श्री महाराजजी द्वारा उत्तर:
शादी का मतलब यह होता है कि अगर सब परिवार स्त्री बच्चे सब भगवान को मानने वाले और एक ही गुरु के द्वारा govern हो रहे हों तो कुछ कुछ ग्रहस्थ में साधना होती है। कुछ कुछ । और तो पहले साधना कर ले कोई व्यक्ति एकांत में,मन को जमा ले भगवान में फिर शादी करे तो danger नहीं है ज्यादा। लेकिन पहले शादी करेगा तो संसार में आसक्त हो जाएगा फिर भगवान की और कहेगा...."देखा जायेगा,बुढ़ापे में करेंगे......करेंगे"। वह एक nature हो जाता है इस प्रकार का तो वह फिर नहीं कर पाता।
और आजकल के वातावरण में तो हर घर में अशांति है। बीबी का कुछ मूड है,बच्चों का कुछ मूड है,बाप बेचारा परेशान रहता है 24 घंटे। शादी से क्या मिला उसको?
जो संसार में रहने वाला अविवाहित व्यक्ति साधना करने चलता है ,उसके लिए विवाह करना कहाँ तक सही या गलत है?
श्री महाराजजी द्वारा उत्तर:
शादी का मतलब यह होता है कि अगर सब परिवार स्त्री बच्चे सब भगवान को मानने वाले और एक ही गुरु के द्वारा govern हो रहे हों तो कुछ कुछ ग्रहस्थ में साधना होती है। कुछ कुछ । और तो पहले साधना कर ले कोई व्यक्ति एकांत में,मन को जमा ले भगवान में फिर शादी करे तो danger नहीं है ज्यादा। लेकिन पहले शादी करेगा तो संसार में आसक्त हो जाएगा फिर भगवान की और कहेगा...."देखा जायेगा,बुढ़ापे में करेंगे......करेंगे"। वह एक nature हो जाता है इस प्रकार का तो वह फिर नहीं कर पाता।
और आजकल के वातावरण में तो हर घर में अशांति है। बीबी का कुछ मूड है,बच्चों का कुछ मूड है,बाप बेचारा परेशान रहता है 24 घंटे। शादी से क्या मिला उसको?
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