This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Wednesday, January 3, 2018
गुरु: कृपालुर्मम शरणम, वंदेsहं सद्गुरु चरणम।।
आज करूँ कहो जनि गोविन्द राधे।
अभी करूँ यह कहि मन को लगा दे।।
आज करूँ कहो जनि गोविन्द राधे।
अभी करूँ यह कहि मन को लगा दे।।
ये नव वर्ष 2018 आपकी सभी की साधना में उत्साह,उन्नति व दिव्य अनुभूतियाँ
लेकर आये। आपकी प्रीति श्री हरि-गुरु चरणों में निरंतर दृढ़ होती जाये एवं
उनकी असीम अनुकंपा का अनुभव करते हुए,इस देव-दुर्लभ मानव देह की
क्षणभंगुरता पर विचार कर तन-मन-धन की सेवा का संकल्प लेकर दिव्य गुरु चरणों
में उनका सदुपयोग कर,हर क्षण को हरि-गुरु के स्मरण में लगा कर आप अपने
जीवन को सफल बनायें।
राधे-राधे।
राधे-राधे।
कभी
कभी लोग हमसे कहते हैं कि महाराजजी हमारा बड़ा दुर्भाग्य है । हमें हँसी
आती है और आश्चर्य भी होता है कि यदि मनुष्य अभागा है तो क्या ये कुत्ता
बिल्ली गधे भाग्य वाले हैं। अरे! तुम्हें चौरासी लाख योनियों मे सबसे ऊपर
मानव देह मिला । भारत जैसे देश में जन्म मिला जहाँ भगवान के इतने अवतार हुए
और संत भी बहुत आए । फिर तत्त्वज्ञान कराने वाला गुरु भी मिला। अनंत जीवों
में कितनो को ये सौभाग्य मिला। सोचो!
----- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
----- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
O
stubborn and foolish mind! Besides spoiling yourself, you are spoiling
me as well. You have wasted countless lives wandering around in the
material world, but have refused time and time again to surrender to the
merciful Radha Rani, who is waiting with open arms to embrace you. It
is not too late. Go to Radhe Rani. She will forgive you and accept you
as Her own.
--- JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
--- JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
मन,
भगवान् में लगाना है । मन गन्दा है और इसके विचार अनन्त जन्म में
बिगडते-बिगडते स्वाभाविक गन्दे हो गये हैं, अतः मन को शुद्ध करना है । मन
से ही अच्छे-बुरे विचार उत्पन्न होते हैं, यदि मन ने अपनी स्थिति ठीक कर
ली, तो सब ठीक हो जायेगा।
------सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका), जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
------सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका), जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
दीनता
भीतर रहे , और बहार से एक्टिंग में क्रोध का व्यवहार भी करना होगा !
संसार में हर तरह का व्यवहार करना होगा लेकिन भीतर गड़बड़ न हो ! भीतर
दीनता , सहनशीलता , नम्रता यही गुण रहें और बाहर से जैसा व्यवहार बाहर वाला
करे उसी का जवाब देना चाहिए ! अब एक बदमाश घर में घुसे और उससे तुम कह दो
कि आप कैसे पधारे ? नहीं , उसकी चप्पल से पिटाई करो , लेकिन भीतर से गड़बड़
न करो ! ये मतलब है ! दीनता , नम्रता और सरे गुण अंतःकरण में रहने चाहिये
और संसार के व्यवहार में सब तरह का व्यवहार करना चाहिए
! जैसा पात्र हो वैसा व्यवहार करो ! बच्चे का सुधार करना है , उसको
डाँटना है , गुस्से की एक्टिंग करो , गुस्सा न करो ! भीतर गड़बड़ न करो ,
बाहर से गड़बड़ की एक्टिंग करो ! इतने मर्डर किये अर्जुन ने , हनुमान जी ने
, प्रह्लाद वगैरह ने , भीतर गड़बड़ नहीं हुआ बाहर से सब एक्टिंग हो रही है
! पिक्चर में जैसे प्यार की एक्टिंग करते हैं , दुश्मनी की एक्टिंग करते
हैं , मारधाड़ करते हैं , वैसे ही मुँह बनाते हैं ! लेकिन भीतर नहीं ! वो
तो पैसा कमाने को एक्टिंग कर रहे हैं ऐसे ही हमको बाहर से व्यवहार करना है
अनेक प्रकार का लेकिन भीतर नार्मल रहें !
***जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज***
***जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज***
शास्त्रों
के अनुसार प्रत्येक जीव कर्मबन्धन में है। प्रारब्धानुसार जितना भी
सांसारिक सुख(जिसका वास्तविक स्वरुप दु:ख है) जिसके भाग्य में लिखा है
मिलेगा ही।अरे भाई, हम जब शास्त्रों में पढ़ते हैं कि सर्वशक्तिमान् भगवान्
राघवेन्द्र सरकार के पिता मर गये,किन्तु राम ने नहीं बचाया;इसी प्रकार
जिसके मामा पूर्णतम पुरुषोत्तम ब्रह्म श्रीकृष्ण और पिता महापुरुष
अर्जुन,दोनों मिल कर भी अभिमन्यु को नहीं बचा सके,तब हमें भी समझ लेना
चाहिये कि हम दशरथ,अभिमन्यु आदि से तो बड़े नहीं जो हमारे लिये भगवान्
काअकाट्टय विधान कट जायगा।
----- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
----- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
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