Monday, March 12, 2018

जय हो जय हो सद्गुरु सरकार बलिहार बलिहार। तेरी महिमा अपरंपार बलिहार बलिहार।।
जिनके दिव्यज्ञान से युक्त प्रवचन सभी शंकाओ का समाधान करते हुए भक्तियोग का सीधा सरल मार्ग प्रशस्त करते हैं। जिन्होनें भारत की अतुल संपत्ति शास्त्रों ,वेदों,उपनिषदों एवं अन्यानय धर्म ग्रन्थों के दुर्लभ ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाकर ऋषि मुनियों की परंपरा को पुनर्जीवन प्रदान किया है। ऐसे भक्तियोग रसावतार सद्गुरु देव के श्री चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम।
समस्त शास्त्रों वेदों के गूढ़तम सिद्धांतों को भी सरल सरस रूप में प्रस्तुत करके जन साधारण के मस्तिक्ष में बिठाना,जिनके व्यक्तित्व की विलक्षणता रही है। ऐसे ज्ञान के अगाध समुद्र को कोटि-कोटि प्रणाम।
जिन्होंने भारतीय संस्कृति ,सभ्यता की ज्योति को शास्त्रीय ज्ञान के द्वारा ऐसा प्रज्ज्वलित कर दिया है जो कभी नहीं बुझेगी। सनातन धर्म सनातन रहेगा । ऐसे महामनीषी को शत शत प्रणाम।

यह ध्यान रहे कि जब तक मन ईश्वर के अतिरिक्त अन्यत्र कहीं भी राग या द्वेष युक्त (आसक्त) रहेगा,तब तक ईश्वर-शरणागति असम्भव है।
----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
आपकी जितनी आयु शेष है, यदि उसका एक-एक श्वास आपने भगवान् काे साैंप दिया ताे सारे पाप-तापाे से मुक्त हाेकर आप इसी जन्म में भगवान काे पाकर अनन्त जीवन की साध पूरी कर सकते हैं। आशा है,आप मेरी प्रार्थना पर ध्यान देंगे।
------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

सैकड़ो तप,व्रत,तीर्थ,उपवास,आदि कर लें तो भी जब तक भगवान् में अपनापन नहीं है,तब तक सब बेकार है।
-----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

जिससे प्यार करोगे मरने के बाद उसी की प्राप्ति होगी। तुमने बाप से प्यार किया ? हाँ। तुम्हारा बाप मरने के बाद गधा बनेगा। अच्छा। तो ? तुम गधे के बच्चे बनोगे। बनना पड़ेगा। तुम बच नहीं सकते। क्योंकि पिता की तुमने भक्ति की है। जिससे भी प्यार करेगा जीव उसी की प्राप्ति होगी मृत्यु के पश्चात।
तो भगवान् उनका नाम , उनका रूप , उनका गुण , उनकी लीला , उनके धाम , उनके संत इतने का नाम है , ' ईश्वरीय क्षेत्र '। इसमें कहीं भी मन रहे तो भगवद विषय मिलेगा। माया से उतीर्ण हो करके भगवान् के दिव्यानंद को प्राप्त करोगे।
------ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

श्री महाराजजी से प्रश्न: हमें अपने चिंतन के प्रति सावधान क्यों रहना चाहिए?
श्री महाराजजी द्वारा उत्तर : क्योंकि हमारे उत्थान और पतन का कारण हमारा चिंतन है। भगवदविषयों के विपरीत चिंतन से हमारी बुद्धि मोहित हो जाती है।

Thursday, February 8, 2018

वेद,कुरान,बाइबिल हर ग्रन्थ में एक ही बात लिखी है,जो संसारी वैभव विशेष पा लेगा,वह ईश्वर की ओर नहीं चल सकता। मेहनत से कमाया हुआ तो फ़िर भी एक बार को ज़मीन पर रहेगा जबकि वैसे उसका भी असंभव ही है पर जिसके पास (चार सौ बीसी) 420 करके मुफ़्तख़ोरी का पैसा है, गरीबों का लूट-लूट के जमा किया है, उसका तो ज़मीन पर टिके रहना सर्वथा असंभव है। वो बिना वज़ह ही उड़ा फिरेगा।
नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं।।
श्रीमद वक्र न कीन्ह केहि प्रभुता बधिर न काहि।
इसलिए कुन्ती वर माँगती है हम को संसार के हर पदार्थ का अभाव दे दो। हमारे सारे जो रिश्तेदार हैं हमें गालियाँ दें,दुतकारें,फटकारें,अपमानित करें,और धन भी मत दो ताकि हमारे पीछे कोई लगे न।आप तो बड़े काबिल हैं सेठजी आप तो बड़े दानी हैं,आप तो दानवीर कर्ण हैं। ये जो चारों ओर से वाक्य सुनने को मिलते हैं सेठजी को,तो सेठजी सचमुच समझ लेते हैं,मैं कर्ण हो गया और जब पैसा खतम हो गया और सेठजी के पास कोई नहीं जाता बुलाने पर भी तब सेठजी की समझ में आता है कि सेठजी में कोई विशेषता नहीं थी। ये रुपये में विशेषता थी। 'पेड़ में फल लगे,चहकते हुए पक्षी आ गये बिना बुलाये।फल गिर गये,बिना कहे पक्षी उड़ गये' ठीक इसी प्रकार ये सारा संसार है।
---- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...