Wednesday, May 2, 2018

जगदगुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज के श्रीमुख से अमृत वचन:
जब संसारमात्र ही सदोष है,तो हम कहाँ तक दोष-चिन्तन करेंगे। यदि यह कहो कि क्या करें,दोष-दर्शन स्वभाव-सा बन गया,तो हमें कोई आपत्ति नहीं,तुम दोष देख सकते हो,किन्तु दूसरों के नहीं,अपने ही दोष क्या कम हैं। अपने दोषों को देखने में तुम्हारा स्वभाव भी न नष्ट होगा,तथा साथ ही एक महान् लाभ भी होगा। वह महान् लाभ तुलसी के शब्दों में- ' जाने ते छीजहिं कछु पापी' अर्थात् दोष जान लेने पर कुछ न कुछ बचाव हो जाता है,क्योंकि वह जीव उनसे बचने का कुछ न कुछ अवश्य प्रयत्न करता है।
----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
अगर उसकी डांट पर,उसके समझाने पर,उसके दोष निकालने पर,जीव विभोर हो जाता है,रोम-रोम से,तो समझ लो,उसका कल्याण हो गया।लेकिन जब तक विभोर नहीं होता है वो,समझ लो कि वह शरणागत है ही नहीं। वह धोखे में है,वह समझता है कि मैंने प्रणाम कर लिया है,चरणामृत ले लिया है,आरती कर लिया है तो मैं गुरु जी के शरणागत हो गया। यह सब बहिरंग क्रियायें है। मन-बुद्धि की शरणागति से ही काम बनेगा।
-----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
जब आज को कल पर टालते ही रहोगे तो उम्र चाहे जितनी हो कभी भगवत भजन प्रारम्भ नही कर सकोगे। बुढापे मे तो अपना शरीर ही सम्भालना मुश्किल हो जाता है। भजन एवं सेवा क्या करोगे ? अगर तुम्हारा भगवत प्राप्ति, भगवत प्रेम ही लक्ष्य है तो फिर देर किस बात कि? किसका इन्तजार है? करुणा निधि के समक्ष दीन बनकर एक बार केवल एक बार सच्चे हृदय से कहकर तो देखो। वे सब कुछ दे देंगे।
---जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
व्यर्थ चिंता मत करो , तुम सिर्फ हरि-गुरु का रुपध्यान करो और रो रोकर पुकारो मैं आ जाऊंगा ।
जैसे मैंने तुम्हें इस बार ढूंढ लिया था वैसे आगे भी ढूंढ लूंगा; यह मेरा काम है आप उसकी चिंता न करें ।
तुम सिर्फ निष्काम भाव से हरि-गुरु में ही अनन्य होकर साधना करते रहो , मेरा काम मै करुंगा ही जैसे सदा करते आया हूॅ, तुम अपना काम (मेरे द्वारा दिऐ उपदेशो के अनुसार साधना) करते रहो बस !! बाकी सब मेरा काम है मैं स्वयम् कर लूंगा, दृढ़ विश्वास करके साधना-पथ पर चलते रहो ।
----- तुम्हारा 'महाराजजी' ।

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दूसरे के दोष न देखो,परनिंदा न करो। दूसरों को सुधारने के लिये भी उनके दोष न देखो। भगवतप्राप्ति से पहले ऐसा कौन है जो दोषरहित हो। अरे! कोई न कोई दोष तो हर किसी में विध्यमान है ही। सभी माया के अंडर में हैं,सभी दोषी हैं। तुम लोगों को दूसरों की तो बड़ी भारी फिक्र है लेकिन स्वयं का तुम्हारा क्या होगा,इसकी फिक्र क्यों नहीं करते हो।
-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

Sunday, April 29, 2018

अनेक प्रकार के दुःख भोगते किसी प्रकार हमने करवट बदलना सीखा,फिर बैठना सीखा। फिर खड़े होना सीखा। बार-बार गिरे, रोये, कष्ट हुआ गिरने में,लेकिन अभ्यास करते-करते चलने लगे।
लेकिन फिर दुःख ही दुःख।
इधर से बाप की डाँट , माँ की डाँट, भाई की डाँट,सब बड़े-बड़े लोग डाँटते जा रहे हैं।
कहाँ जा रहा है? क्या मुँह में डाल लिया? बदतमीज़।
और मुझको अक्ल तो थी नहीं कुछ, क्या करूँ?
भूख लगी थी, सामने एक लकड़ी पड़ी थी,उठाया और मुँह में डाल लिया।
लो, उसकी भी डाँट पड़ गई।
और कोई-कोई माँएँ तो खूब पिटाई करती हैं,
छोटे-से बच्चे की भी। रो दिये, क्या करें?
और बड़े हुये, स्कूल जाओ! और लो मुसीबत।अभी तक तो खेलते थे,कुछ मनोविनोद हो जाया करता था।
अब मम्मी-डैडी डंडा दिखा रहे हैं, स्कूल जा।
गये।वहाँ मास्टर बैठा है हौआ।
वो रुआब दिखाता है, डाँटता है,ऐ! क्या कर रहा है, ठीक से बैठो। अरे, मैं ठीक से बैठूँ, कितनी देर बैठूँ ठीक से?
घर में तो उछल-कूद करता था लगातार और यहाँ घंटों, दो घंटे, चार घंटे बैठे रहो।
ये आधीनता कितना कष्ट देती है। वो भी सहा।
अब परीक्षा आई। ओह! धुक-धुक, कहीं फ़ैल न हो जायें।।पास हुये, फिर आगे की पढ़ाई की चिन्ता।
इसी में हमारी चौबीस-पच्चीस साल की उम्र
समाप्त हो गई। उसके बाद मेम साहब आई।
और मुसीबत खड़ी हुई। उनका डर, बार-बार...
कहाँ गये थे? अरे, कहीं थे, तुमसे क्या मतलब?
मतलब कैसे नहीं है?
----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
DON'T MISS FACEBOOK LIVE BROADCAST:
Divine Sankirtan by Sushri Shreedhari Didi (Preacher of Jagadguruttam Shri Kripalu Ji Maharaj) on Monday 30th April, 2018.TIME: 5.00 P.M. to 7.30 P.M.
This Satsang Program will be Broadcast 'Live on Facebook'' for all Devotees around the Globe on my Timeline (https://www.facebook.com/sharadgupta1008 ) and in your favourite Group (https://www.facebook.com/groups/361497357281832/ ) & also on your favourite Pages ( https://www.facebook.com/ShreedhariDidi/ ) & ( https://www.facebook.com/radhakripalu/ ) respectively.
Live Satsang Video will also be Shared to other Groups and Pages Managed by Us .DON'T MISS THIS GOLDEN OPPORTUNITY.
Jai Shri Radhey.
जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की प्रचारिका सुश्री श्रीधरी दीदी द्वारा दिव्य रसमय संकीर्तन का FaceBook पर सीधा प्रसारण दिनाँक 30अप्रैल, 2018 (सोमवार) को साँय 5 बजे से 7.30 बजे तक किया जायेगा। इस सत्संग कार्यक्रम का आनंद आप घर बैठे ही मेरी Timeline पर ( https://www.facebook.com/sharadgupta1008 ) एवं श्री महाराजजी के दिव्य ज्ञान के प्रचार के लिये बनाये गए आपके अपने सबसे बड़े एवं प्रिय ग्रुप (https://www.facebook.com/groups/361497357281832/ ) एवं साथ ही आपके अपने प्रिय Pages ( https://www.facebook.com/ShreedhariDidi/ ) & (https://www.facebook.com/radhakripalu/ ) में 'FaceBook Live'(सीधे प्रसारण) के माध्यम से ले सकते हैं। हमारे द्वारा संचालित अन्य ग्रुप्स/Pages में भी ये Live Video शेयर किया जायेगा। अतः आप सभी से निवेदन है कि इस स्वर्णिम अवसर का लाभ अवश्य उठायें।
जय श्री राधे।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...