This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Wednesday, June 6, 2018
प्रत्येक आत्मा श्यामसुन्दर का देह है। और जैसे आपका यह प्राकृत देह आपकी ही अर्थात् आत्मा की ही सर्विस करता है, प्रतिक्षण आत्मा को सुख देने के लिये ही संकल्प से लेकर क्रियायें तक करता है। उसी प्रकार श्यामसुन्दर का देह अर्थात् आत्मा भी श्यामसुन्दर का नित्य किंकर है, किन्तु इस आत्मा ने अनादिकाल से देह को आत्मा मान लिया अर्थात् आत्मा को देही नहीं माना, देह मान लिया, इस भ्रम के कारण देह सम्बन्धी विषयों में अर्थात् संसार के पदार्थों को विषय बनाकर, इन्द्रियों के सुखों में लिप्त हो गया और यह क्रम अनन्तानन्त युगों से चला आ रहा है। अगर कभी सौभाग्य से कोई जीव स्व स्वरुप को जान ले अर्थात् ' मैं ' को श्यामसुन्दर का नित्य किंकर रियलाइज करे, विश्वासपूर्वक माने, तो फिर श्यामसुन्दर की प्राप्ति में कुछ भी देर नहीं,कुछ भी साधना की अपेक्षा नहीं।
---- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
---- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
यह मनुष्य का शरीर बार–बार नहीं मिलता। दयामय भगवान् चौरासी लाख योनियों में भटकने के पश्चात् दया करके कभी मानव देह प्रदान करते हैं। मानव देह देने के पूर्व ही संसार के वास्तविक स्वरूप का परिचय कराने के लिए गर्भ में उल्टा टाँग कर मुख तक बाँध देते हैं। जब गर्भ में बालक के लिए कष्ट असह्य हो जाता है तब उसे ज्ञान देते हैं और वह प्रतिज्ञा करता है कि मुझे गर्भ से बाहर निकाल दीजिये, मैं केवल आपका ही भजन करूँगा । जन्म के पश्चात् जो श्यामसुन्दर को भूल जाता है, उसकी वर्तमान जीवन में भी गर्भस्थ अवस्था के समान ही दयनीय दशा हो जाती है। ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि यह मानव देह देवताओं के लिये भी दुर्लभ है, इसीलिये सावधान हो कर श्यामसुन्दर का स्मरण करो।
( प्रेम रस मदिरा:सिद्धान्त–माधुरी )
---जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
सर्वाधिकार सुरक्षित:- राधा गोविन्द समिति।
---जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
सर्वाधिकार सुरक्षित:- राधा गोविन्द समिति।
अरे मनुष्याे! श्रद्धा कराे, श्रद्धा पैदा कराे, गुरु वाक्य पर पूर्ण विश्वास करो। पहले ही अनुभव नही हाेगा। अजी पहले अनुभव कराओ ताे हम विश्वास करें। पहले अनुभव कराओ, पहले डिग्री मिल जाये उसके बाद पढ़ाई शुरु करेंगे। पहले फल मिल जाये,फिर बीज डालेंगे खेत में। संसार में ऐसा कहीं हुआ है? बस,भगवान् के एरिया में आप इम्पाँसिबल बात करना चाहते है।
------ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
भगवान की उस रूप माधुरी का वर्णन कौन कर सकता है?वे एक बार जिसकी ओर प्रेम की नजर से देख लेते; उसीपर प्रेमसुधा बरसा कर उसे अमर कर देते,उसकी सारी विषयासक्ति को नष्ट कर अपना प्रेमी बना लेते। पंडित जगन्नाथ जी कहते हैं-
"रे चित्त!तेरे हित के लिए तुझे सावधान किये देता हूँ। कहीं तू उस वृन्दावन में गाय चराने वाले,नवीन नील मेघ के सामान कान्ति वाले छैल को अपना बंधू न बना लेना,वह सौन्दर्य रूप अमृत बरसाने वाली अपनी मंद मुस्कान से तुझे मोहित करके तेरे प्रिय समस्त विषयो को तुरंत नष्ट कर देगा।"
जय श्री राधे।
"रे चित्त!तेरे हित के लिए तुझे सावधान किये देता हूँ। कहीं तू उस वृन्दावन में गाय चराने वाले,नवीन नील मेघ के सामान कान्ति वाले छैल को अपना बंधू न बना लेना,वह सौन्दर्य रूप अमृत बरसाने वाली अपनी मंद मुस्कान से तुझे मोहित करके तेरे प्रिय समस्त विषयो को तुरंत नष्ट कर देगा।"
जय श्री राधे।
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






