Thursday, July 19, 2018

श्री राम जै राम अवध बिहारी, शरण शरण मैं तो शरण तिहारी।
आत्माराम पूर्णकाम अवध बिहारी,नयनाभिराम राम शरण तिहारी।।

एक छोटी-सी बात भी इस #जीव की समझ में नहीं आती, और अगर यह नहीं आयी तो कुछ भी करना कोई सेंस नहीं रखता। जब हमें एक अथॉरिटी मिल गयी, एक गार्जियन मिल गया तो अपने आपको उसे सौंप दो । उसकी आज्ञा के अनुसार ही चलो । यह आपको ही करना होगा। चाहे एक जन्म में करो, चाहे हजार जन्म में करो। अगर #वास्तविक_गुरु की आज्ञा के अनुसार ही हम चलें तो एक साल में ही हम न जाने कितने आगे बढ़ जायेंगे ।


#भगवान् के नाम में भगवान् का निवास है और वह भगवान् से अधिक इम्पोर्टेन्ट है। क्यों ? अगर भगवान् नन्द के यहाँ अवतार लेंगे और वह गोकुल या नंदगाँव में हैं। और बरसाने से कोई भक्त दर्शन करना चाहे अभी तुरंत। कैसे करेगा वह ? वह जायेगा नन्दगाँव फिर वहाँ कहाँ है #श्रीकृष्ण देखेगा। और नाम सब जगह है। आप लेट्रीन बाथरूम में जहाँ कहीं आप बैठे हों भगवन्नाम ले सकते हैं। डरें नहीं कि ये गन्दी जगह में भगवान् का नाम कैसे लें ? भगवान् का नाम गंदे को शुद्ध कर देता है , भगवान् अशुद्ध नहीं होते। अनंत पाप तो भरा है मन में। उसी को तो शुद्ध करने के लिये प्रयत्न करना है। अगर हम यह कहें कि गन्दगी में भगवान् का निवास कराना बड़ी बुरी बात है तो हमारा मन कभी शुद्ध ही न होगा। कहाँ से हम मन को शुद्ध करके लायेंगे ? तो भगवान् का नाम लेंगे। इसलिये आप हर जगह ,हमेशा भगवान् को अपने साथ माने। हरि गुरु हमारी हर हरकत को देख रहें हैं। नोट कर रहें हैं। ये विश्वास बढ़ावें , यह रियलाइज़ (realize) करेंगे उतना ही जल्दी आगे बढ़ेंगे। देखो हमारे यहाँ धन्ना जाट वगैरह तमाम इतिहास भरा पड़ा है। सब लट्ठ गँवार , बेपढ़े लिखे। विश्वास कर लिया बस विश्वास मात्र से भगवत्प्राप्ति होती है।
जय हो जय हो अलबेलो सरकार, बलिहार बलिहार।
जय हो नागर नंदकुमार, बलिहार बलिहार।
जय हो राधा प्राणाधार, बलिहार बलिहार।
जय हो सखिन प्राण साकार ,बलिहार बलिहार।
जय हो रसिकन को सरदार, बलिहार बलिहार।
जय हो दिव्य प्रेम अवतार, बलिहार बलिहार।
जय हो मम 'कृपालु' सरकार, बलिहार बलिहार।।

बलिहारी बलिहारी वारी बनवारी।
तन मन प्राण हौं वारी बनवारी।
मुसुकनि दिव्य सरस बनवारी।
दिव्य तनु दिव्य सुगंध बनवारी।
ललित त्रिभंगी तनु बनवारी।
निज मन मोहिनि छवि बनवारी।।


#प्रेम_तत्व की सार #मादन स्वरुपा #रासेश्वरी श्री #राधारानी ही #सर्वश्रेष्ठ #तत्व है । #श्रीकृष्णजिसकी #आराधना करें, उस तत्व का नाम #राधा #तत्व है । जिसकी चरण-धूलि ब्रह्म श्री कृष्ण अपने सिर पर धारण करते हैं, जिसके अंक में लेटे हुये श्री कृष्ण #गोलोक को भूल जाते हैं, ऐसी सत्ता का नाम है-'#राधा', जिसकी अंश है- ब्रह्माणी, शिवानी, कमला आदि॥
The philosophy of #Divine #love is an #eternal Truth, the path of #Divine #Love #Consciousness (Raganuga Bhakti) is an Eternal Religion, and the Bliss of #Radha #Krishna is the actual Divine substance your #soul has been looking for since eternity.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...