Sunday, September 23, 2018

"#BHAKTI" :
It is described as an unconditional dedication of Heart,Body,and Mind to please RadhaKrishn.It is an experience of Devotional affinity,not just the fulfillment of religious rituals.It is a joy of desired servitude to the divine beloved,not the observance of a prescribed formality.It is a pure expression of natural,selfless love,not a prayer demanding the fulfillment of material needs.'Bhakti' is a loving affinity that grows on the base of humbleness,dedication and devotional emotions that are enlivened by remembering the name,virtues and leelas of RadhaKrishn."
कामं क्रोधं भयं स्नेहमैक्यं सौहृदमेव च।
नित्यं हरौ विदधतो यान्ति तन्मयतां हि ते॥
(भागवत १०-२९-१५)
#काम#क्रोध#स्नेह#भय किसी भी #भाव से अगर #मन में #भगवान् को लावे, तो उसका मन भगवान् से मिल कर #शुद्ध हो जायेगा। #गंगा जी में प्यार से #यमुना जी मिलें तो भी #प्रयाग से वह गंगा जी कहलायेंगी। और चाहे कोई कुल्ला कर दे #पापात्मा, वो कुल्ला, उसका मुँह से उच्छिष्ट पानी, गंगा जी नदी में मिल गया, अब वो गंगा जी हो गया। इतनी नदियाँ मिलती हैं गोमुख के बाद बंगाल की खाड़ी तक, कितने झरने मिलते हैं, सब गंगा जी बन गए।
गंगा जी गन्दी नहीं होतीं, जो गंगा जी से मिलता है, वो शुद्ध हो जाता है, गंगा बन जाता है।
संसार में भी यह बता रहे हैं।
रवि पावक सुरसरि की नाईं।
अग्नि में तमाम मुर्दे जलते हैं और हवन भी होता है।देवताओं को। अग्नि कहता है, हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा,
जो हमारे अन्दर आएगा, मैं अग्नि बना दूँगा। जला दूँगा।
मैं तो शुद्ध रहूँगा ही। सूर्य कितनी गन्दी चीज़ों में पड़ता है
और शुद्ध वस्तु में भी पड़ता है, लेकिन वो गन्दा नहीं होता। तो, भगवान् या महापुरुष जो शुद्ध हैं,
उससे अशुद्ध व्यक्ति प्यार करेगा, तो वो अशुद्ध शुद्ध हो जायेगा। शुद्ध अशुद्ध नहीं होगा।
मेरी श्यामा मेरे श्याम,विहरत नित वृन्दावन धाम।
मेरी श्यामा मेरे श्याम, इक शृंगार एक छविधाम।
मेरी श्यामा मेरे श्याम,दे दो भीख प्रेम निष्काम।
मेरी श्यामा मेरे श्याम,दोउन एक रूप द्वै नाम।
मेरी श्यामा मेरे श्याम, देत 'कृपालु' कृपा बिनु दाम।।
संसार में जिसे तुम बहुत अपना मानते हो........माँ , बाप , भाई, बीवी, दोस्त। अगर वो एक बार तुमसे कोई जरा सा झूठ बोल दे तो कितना फील करते हैं न आप लोग ?? कितना अपमान लगता है न अपना की हमसे झूठ बोला इसने जबकि मैं इसे कितना अपना मानता हूँ।
और कभी सोचा है कि....वो गुरु और भगवान .....जो तुम्हे सबसे ज्यादा अपना मानते है ...अरे मानना क्या है....... तुम्हारा वास्तव में माँ बाप भाई प्रियतम और है ही कौन .....सारे रिश्ते तो उन्हीं से हैं न , वो तुम सब की तरफ हर पल इसी आशा में देखते रहते है कि अबकी बार ये सच ही बोल रहा है , कीर्तन में जो लाइन बोल रहा है वो सच ही बोल रहा है । अबकी बार ये पूर्ण शरणागत हो जायेगा और मैं इसे प्रेम दान कर दूंगा। पर होता क्या है ......हम झूठ पे झूठ- झूठ पे झूठ-झूठ पे झूठ बोले चले जा रहे हैं आराम से ....कोई परवाह ही नहीं है। वो हमे परखते ही रहे जा रहे हैं अनंत काल से और हम झूठ बोले चले जा रहे हैं आराम से। संसार के रिश्तों को तो वास्तव में अपना मानते हैं और जो वास्तव में अपने हैं उनसे झूठ बोले जा रहे हैं....कमाल है !...कभी सोचा है कि कितना दुःख होता होगा उन्हें ?????
अपना अपमान अपमान है बस....#गुरु और #भगवान का अपमान अपमान नहीं है क्या ? उन्हें कितना फील होता होगा जरा सोचो।
------- तुम्हारा #कृपालु
राधा–तत्त्व का वर्णन सर्वथा अनिर्वचनीय है।
शुक, सनकादिक जीवन्मुक्त अमलात्मा परमहंस निर्विकल्प समाधि में ध्यान - द्वारा जिस ज्योतिर्मय ब्रह्म की आराधना करते हैं, वह ब्रह्म श्री किशोरी जी के चरण–कमलों की नखमणि–चंद्रिका ही है अर्थात् किशोरी जी के चरणों की नख–मणि चंद्रिका को ही रसिक लोग निराकार ब्रह्म मानते हैं। उस निराकार ब्रह्म के बारे में ही वेदों का कथन है कि वह ब्रह्म अदृष्ट, अव्यवहार्य, अग्राह्य, अलक्षण एवं अचिन्त्य आदि हैं। फिर वह ब्रह्म भी गीता के अनुसार जिसमें प्रतिष्ठित है, वे ब्रजेन्द्रनन्दन श्रीकृष्ण हैं । ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि वेदों के अनुसार वे श्रीकृष्ण भी राधिका की उपासना करते हैं । अतएव राधा–तत्त्व को जानने के चक्कर में न पड़कर तुम भी उनकी उपासना करो। वस्तुतस्तु श्री राधा, श्रीकृष्ण की ही आत्मा हैं । अतएव जीवात्माओं की भाँति परमात्मा भी अपनी आत्म–स्वरूपा श्री राधा की आराधना करता है।
( प्रेम रस मदिरा: श्रीराधा–माधुरी )
#जगद्गुरु_श्री_कृपालु_जी_महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति।
नींद जो है वो तमोगुण है। जाग्रत अवस्था में हम सत्वगुण में जा सकते हैं,रजोगुण में भी जा सकते हैं। लेकिन नींद जो है वो प्योर(pure) तमोगुण है। बहुत ही हानिकारक है। अगर लिमिट से अधिक सोओ तो भी शारीरिक हानी होती है। आपके शरीर के जो पार्ट्स हैं उनको खराब करेगा वो अधिक सोना भी। रेस्ट की भी लिमिट है। रेस्ट के बाद व्यायाम आवश्यक है। देखिये शरीर ऐसा बनाया गया है कि इसमें दोनों आवश्यक हैं। तुम्हें संसार में कोई जरूरी काम आ जाए,या कोई तुम्हारा प्रिय मिले तब नींद नहीं आती। इसलिए कोई फ़िज़िकल रीज़न नहीं कारण केवल मानसिक वीकनेस है। लापरवाही,काम न होना,नींद आने का प्रमुख कारण है। हर क्षण यही सोचो की अगला क्षण मिले न मिले अतएव भगवद विषय में उधार न करो।
------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
The Divine Love of Radha Krishn.......!!!
* "Your soul is yearning for such a love that could extend the peace and happiness of your mind to a non-ending limit and make your heart blissful forever."
* "Drink the nectar of Divine love of Both, Radha and Krishn, as They are one."
* "Fill up the pot of your heart with the nectar of Divine love of Radha Krishn and drink it all the time."
* "Krishn loves the loving heart. He submits Himself to His selfless lover."
* "The Divine nectar of Radha Krishn love is such that once the pot is filled it always remains full."
* "‘Radha’ name is Radha Herself. If you just realize this truth, it is enough to explode your feelings of love for Her and to really feel Her presence in front of you…"

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...