This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Monday, July 29, 2019
Grace of Guru is “सदा के लिए” (for FOREVER)...!!!
Once, Shri Maharaji was describing the meaning of the word 'Guru'. He explained ‘Gu’ means Maya (ignorance) and ‘Ru’ means one who destroys it . He then stressed that Guru releases a Soul from Maya 'FOREVER' by using the phrase ‘सदा के लिए’ (meaning FOREVER) 3 or 4 times.
Imagine, Maya has tormented us so much since time immemorial because of our misdeeds. And Guru show souls the right path and on complete surrender releases a Soul from Maya and bestow Divine Love. And These Gifts of His are FOREVER, No more Maya FOREVER, a Soul is blissful FOREVER, is with God FOREVER…Imagine the Grace….!!!
RADHEY-RADHEY.
हाय! सखि, कैसे ह्वै गये श्याम।
जो आधे–पलहूँ नहिं रहि सक, बिनु राधे इक ठाम।
सो ऐसे बेपीर भये कस, वीर! तज्यो ब्रजबाम।
तजि देइहैं पिय प्रीति–रीति अस, होति प्रतीति न नाम।
हौं भल जान न मान सखी यह, चैन कान्ह उर धाम।
होत ‘कृपालु’ कबहुँ उर संशय, हरि हैं आत्माराम।।
जो आधे–पलहूँ नहिं रहि सक, बिनु राधे इक ठाम।
सो ऐसे बेपीर भये कस, वीर! तज्यो ब्रजबाम।
तजि देइहैं पिय प्रीति–रीति अस, होति प्रतीति न नाम।
हौं भल जान न मान सखी यह, चैन कान्ह उर धाम।
होत ‘कृपालु’ कबहुँ उर संशय, हरि हैं आत्माराम।।
भावार्थ:–(श्यामसुन्दर के वियोग में गोपियों का विलाप-)
“हाय सखी! श्यामसुन्दर अब कैसे हो गये हैं? जो किशोरी जी के बिना आधे क्षण में ही बेचैन हो गये थे, वे ऐसे निष्ठुर कैसे हो गये जो किशोरी जी सहित समस्त ब्रजांगनाओं का परित्याग कर दिया? प्रियतम प्रीति की रीति को इस प्रकार त्याग देंगे, यह विश्वास नाम–मात्र को भी नहीं होता। अरी सखी! मैं भली-भाँति जानती हूँ, अतएव यह मानने को तैयार नहीं हूँ कि श्यामसुन्दर चैन से होंगे”। ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि फिर भी कभी–कभी हृदय में यह शंका हो जाती है कि श्यामसुन्दर तो आत्माराम हैं।
“हाय सखी! श्यामसुन्दर अब कैसे हो गये हैं? जो किशोरी जी के बिना आधे क्षण में ही बेचैन हो गये थे, वे ऐसे निष्ठुर कैसे हो गये जो किशोरी जी सहित समस्त ब्रजांगनाओं का परित्याग कर दिया? प्रियतम प्रीति की रीति को इस प्रकार त्याग देंगे, यह विश्वास नाम–मात्र को भी नहीं होता। अरी सखी! मैं भली-भाँति जानती हूँ, अतएव यह मानने को तैयार नहीं हूँ कि श्यामसुन्दर चैन से होंगे”। ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि फिर भी कभी–कभी हृदय में यह शंका हो जाती है कि श्यामसुन्दर तो आत्माराम हैं।
(प्रेम रस मदिरा:-विरह-माधुरी)
#जगद्गुरु_श्री_कृपालु_जी_महाराज।
सर्वाधिकार सुरक्षित:-राधा गोविन्द समिति।
#जगद्गुरु_श्री_कृपालु_जी_महाराज।
सर्वाधिकार सुरक्षित:-राधा गोविन्द समिति।
विनम्र निवेदन!
प्रिय साधक समुदाय।
श्री महाराज जी के चरणों में प्रणाम करते हुये गुरुपूर्णिमा के पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक बधाई दे रही हूँ।
भक्ति - धाम में आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन है। यह श्री महाराजजी की जन्मस्थली आप सभी को श्री महाराजजी का दिव्य सन्देश दे रही है। यहाँ का कण कण दिव्य चिन्मय है जो भक्ति का अनुपम स्रोत है क्योंकि यहाँ श्री महाराजजी ने अहनिर्श श्यामा-श्याम गुण - गान कराया है।
अखण्ड संकीर्तन , करुण क्रन्दन युक्त साधना यही यहाँ का इतिहास है। यहाँ रहकर गुरु सेवार्थ जीवन समर्पित करने वाले तो धन्य हैं ही किन्तु आप सब भी परम सौभाग्यशाली हैं जो गुरुधाम में साधना करने के लिये समय समय पर आतें हैं। और श्री महाराजजी की सहर्ष सेवा करते हैं।
अखण्ड संकीर्तन , करुण क्रन्दन युक्त साधना यही यहाँ का इतिहास है। यहाँ रहकर गुरु सेवार्थ जीवन समर्पित करने वाले तो धन्य हैं ही किन्तु आप सब भी परम सौभाग्यशाली हैं जो गुरुधाम में साधना करने के लिये समय समय पर आतें हैं। और श्री महाराजजी की सहर्ष सेवा करते हैं।
जे.के.पी. द्वारा जितने भी जनहित कार्य किये जा रहे हैं वह श्री महाराजजी की कृपा से अत्यधिक सुचार रूप से चल रहे हैं। वे स्वयं ही योगक्षेम वहन कर रहे हैं , किन्तु आप सभी से मैं आशा करती हूँ कि आप सभी सदैव श्री महाराजजी के कार्यों को आगे बढ़ाने में पूर्ण सहयोग करेंगे। उनके दिव्य संदेशों को , उनकी दिव्य वाणी को , उनके साहित्य को हमें जन -जन तक पहुँचाना है।
शुभकामनायों सहित
तुम्हरी बड़ी दीदी.
तुम्हरी बड़ी दीदी.
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