Friday, February 22, 2013

कोई कहता है कि कामनाओं को छोड़ दो ! एवं कोई कहता है कि केवल श्याम भजन करो ! मेरी राय में दोनों ही भोले हैं ! अतः कामना त्याग एवं हरि अनुराग - साथ साथ करना है !

""""जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज""""
कोई कहता है कि कामनाओं को छोड़ दो ! एवं कोई कहता है कि केवल श्याम भजन करो ! मेरी राय में दोनों ही भोले हैं ! अतः कामना त्याग एवं हरि अनुराग - साथ साथ करना है !

""""""""जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज""""""""

 
 
 

Can you guarantee that you will live to see tomorrow?
कौन जानता है कल का दिन मिले ना मिले ?

----jagadguru shri kripalu ji maharaj.
Can you guarantee that you will live to see tomorrow?
कौन जानता है कल का दिन मिले ना मिले ?
----jagadguru shri kripalu ji maharaj.

 

No one can know God even if he endeavours to know Him for innumerable lifetimes, but when God imparts His Grace to a soul, he can know Him and attain divine bliss for eternity.
-------jagadguru shri kripalu ji maharaj.
No one can know God even if he endeavours to know Him for innumerable lifetimes, but when God imparts His Grace to a soul, he can know Him and attain divine bliss for eternity.
-------jagadguru shri kripalu ji maharaj.




भक्त्ति अर्थात् मन से भगवान् को सोचो, उनका चिंतन, उनका स्मरण करो, भगवान् को पाने के लिये और कुछ नहीं करना ।

 भक्त का चिन्तन भी प्राकृत होता है, लेकिन वो भगवान् से सम्बद्ध है, तो भगवान् अपनी स्वरुप शक्त्ति के द्वारा उस चिन्तन को दिव्य बना देते हैं, इसलिये भक्त का मन वास्तविक भगवान् का चिन्तन करने लगता है । भगवान् शरणागत ज्ञानियों को अपना दिव्य बुद्धियोग, दिव्य ज्ञान देते हैं, जिससे वो मोक्ष प्राप्त करते हैं॥

-जगद्गुरु कृपालुजी महाप्रभु.
भक्त्ति अर्थात् मन से भगवान् को सोचो, उनका चिंतन, उनका स्मरण करो, भगवान् को पाने के लिये और कुछ नहीं करना ।

भक्त्त का चिन्तन भी प्राक्रुत होता है, लेकिन वो भगवान् से सम्बद्ध है, तो भगवान् अपनी स्वरुप शक्त्ति के द्वारा उस चिन्तन को दिव्य बना देते हैं, इसलिये भक्त्त का मन वास्तविक भगवान् का चिन्तन करने लगता है । भगवान् शरणागत ज्ञानियों को अपना दिव्य बुद्धियोग, दिव्य ज्ञान देते हैं, जिससे वो मोक्ष्य प्राप्त करते हैं॥

-जगद्गुरु कृपालुजी महाप्रभु

 

Thursday, February 21, 2013

ब्रह्म जीव माया तत्व, गोविंद राधे |
तीनों हैं अनादि अनंत बता दे ||

ब्रह्म जीव चेतन, गोविंद राधे |
ब्रह्म शक्ति जीव याते अंश बता दे ||
...

ब्रह्म शक्ति माया जड़, गोविंद राधे |
जीव माया शासक ब्रह्म बता दे ||

.............कृपालु – त्रयोदशी
( जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज )
ब्रह्म जीव माया तत्व, गोविंद राधे |
तीनों हैं अनादि अनंत बता दे ||

ब्रह्म जीव चेतन, गोविंद राधे |
ब्रह्म शक्ति जीव याते अंश बता दे ||

ब्रह्म शक्ति माया जड़, गोविंद राधे |
जीव माया शासक ब्रह्म बता दे ||
    
      कृपालु – त्रयोदशी
( जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज )

 

Radhopanishad states, "Radha and Krishna have one intellect, one mind, one soul, and even one face. They have one knowledge. This is why there is no difference between these two. If someone thinks there to be a difference, it is an offence."
Radhopanishad states, "Radha and Krishna have one intellect, one mind, one soul, and even one face. They have one knowledge. This is why there is no difference between these two. If someone thinks there to be a difference, it is an offence."

 

‎'SHRI KRISHNA' AND 'BLISS' ARE SYNONYMOUS WORDS.EVERY PERSON IN THE WORLD DESIRES ONLY BLISS.IN OTHER WORDS HE IS A SERVANT OF BLISS AND THEREFORE UNKNOWINGLY,A SERVANT OF SHRI KRISHNA.
------JAGADGURUTTAM SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.
'SHRI KRISHNA' AND 'BLISS' ARE SYNONYMOUS WORDS.EVERY PERSON IN THE WORLD DESIRES ONLY BLISS.IN OTHER WORDS HE IS A SERVANT OF BLISS AND THEREFORE UNKNOWINGLY,A SERVANT OF SHRI KRISHNA.
 ------JAGADGURUTTAM SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.

 

    मन का अटैचमेंट किसमें करें?

    एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...