Monday, February 11, 2013

जो कर्म भगवान् में प्रेम उत्पन्न नहीं करता , वह अधर्म ही है !

-------- श्री महाराज जी।
जो कर्म भगवान् में प्रेम उत्पन्न नहीं करता , वह अधर्म ही है ! 
( श्री महाराज जी। )

 



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