Saturday, June 6, 2015

सारा खेल मन के चिन्तन और बुद्धि के डिसीजन (decision) पर है। मनुष्य जो चाहे बन सकता है- देव, दानव, या महापुरुष।
.......जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...