Monday, September 14, 2015

भगवान् योग माया के पर्दे में रहते हैं और जीव माया के पर्दे में , अतः भगवान् के साकार रूप में सामने खड़े होने पर हम उन्हें अपनी भावना के अनुसार ही देख पाते हैं !
*****जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज*****

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