Monday, October 5, 2015

God alone is our supreme divine Master, and therefore, we have to engage ourselves constantly in His divine service.
हमारे सेव्य श्रीकृष्ण ही हैं। सेव्य-सेवक भाव से ही साधना-भक्ति करनी होगी।
..........SHRI MAHARAJJI.

No comments:

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...