Saturday, December 19, 2015

श्री कृष्ण का माधुर्य रस इतना विलक्षण है कि श्रीकृष्ण स्वंय अपने आप को देखकर मुग्ध हो जाते हैं एवं अपना ही आलिंगन करना चाहते हैं । अतः वे निजजन के ही मनमोहन नहीं हैं , वरन अपने मन के भी मोहन हैं ।
-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...