Sunday, July 24, 2016

जोइ भानुनंदिनी, सोइ नँदनंदन, सोइ सत चित सुखघन वृन्दावन।
श्याम नाम रूप लीला धाम गुन गन जन, इनमें न भेद कछु सबमें है सब मन।।
-------- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

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