Thursday, January 19, 2017

मन में निश्चय करो की हमारा लक्ष्य हरि-गुरु सेवा ही रहे, हम उन्हीं के लिए ही सब काम करें, उन्हीं के लिए ही जियें और अंत में हरि-गुरु का स्मरण करते हुए ही इस नश्वर शरीर को त्याग कर भगवान के श्रीचरणों में चलें जाएँ ।
जय श्री राधे।



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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...