Monday, April 10, 2017

गुरु के ऋण से उऋण होने के लिये श्रेष्ठ शिष्य का एकमात्र कर्त्तव्य है कि विशुद्ध निष्काम भाव से गुरु चरणों में सर्वसमर्पण कर दे।
-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

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