Wednesday, October 11, 2017

माया के कारण अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाने एवं अपने को शरीर मान लेने के कारण मैं अनादिकाल से निरंतर संसार में ही अनुरक्त था ।
गुरु ने इस मोह - निद्रा से जगाकर यह ज्ञान कराया कि तेरी अंशी श्री राधा ही एक मात्र तेरी हैं ।

---जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ।

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