Monday, November 13, 2017

मानव होकर के हम निराशा का चिन्तन करें , इससे बड़ा कोई अपराध नहीं है , अविवेक नहीं है।

.......श्री महाराज जी।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...