Thursday, February 8, 2018

कुसंग का प्रकरण बहुत लम्बा चौड़ा है वैसे,ये भी आप समझे रहिये कि तमाम किताबों का पढ़ना भी कुसंग है।
ये सब चीज़ें तो वह व्यक्ति करता है जिसको तत्वज्ञान न मिला हो। जिसको सही-सही बात का पता चल गया है,उसे किताबों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिये कोई किताब नहीं पढ़ना है हमको।हमको तो अब करना है,हमको अब प्रैक्टिकल करना है।उससे लाभ होना है किताब को पढ़ करके कुछ नहीं पा सकते हम।
----- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

No comments:

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...