Thursday, August 15, 2019

साधक: महाराज जी, मेरे अंदर तो कोई बुरी आदत नहीं है ?
श्री महाराजजी: 'किसी चीज़ की ख़राबी नहीं' यही ख़राबी है। अपने को अधम पतित गुनहगार मानते हैं संत लोग और तुम कहते हो हमारे अंदर कोई ख़राबी नहीं है। अरे! सबसे बड़ी ख़राबी तो यही है।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...