प्रैक्टिकल से मतलब है, भावना से मतलब है। इसलिये उनकी इच्छा में इच्छा रखना, उनके सुख को ही लक्ष्य रखना। उनकी सेवा की ही सदा भावना रहे, उनको कभी दुःख न होने पाये। ऐसा क्यों किया, ये न कहना पड़े। ऐसा कोई काम हम न करें की उनको दुःख हो। उनके पास रिपोर्ट जाय या वो नोट करके हमको, दुःखी हों। हम सावधान रहें, हमेशा। ये शरणागति, एक दो घंटे की नहीं होती। शरणागति सदा करनी पड़ेगी। निरंतर जैसे 'मैं' को निरंतर रियलाइज़ करते हो। ऐसे ही शरणागति भी निरंतर करनी होगी। थोड़ी देर के लिये शरणागत हो गये और आँसू भी निकल गये, और 'हम बड़े बेवकूफ हैं, गधे हैं, दीन हैं, पापी हैं' - ये फीलिंग भी हो गई, फिर भूल गया। और फिर विपरीत चिंतन कर रहे हैं भगवान् के, गुरु के। ये सब दोगली बातें नहीं करनी होगी। एक लक्ष्य रखना होगा।
इसलिये हर समय सावधान रहना पड़ेगा पहले। जैसे जब पहले-पहले आप लोग साइकल चलाते हैं, कार चलाते हैं, बहुत सावधान रहते हैं। फिर अभ्यास जब हो जायगा तब फिर बात भी कर रहे हैं फोन से भी और गाड़ी भी चल रही है, पीछे आदमी एक साइड मांग रहा है, वो भी दे रहे हैं, सब काम हो रहा है। लेकिन पहले तो बहुत सावधान रहना पड़ेगा।

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