Saturday, August 25, 2012


गुरु का एक ही अर्थ है, जो तुम्हारी नींद तोड़ दे। और नींद का टूटना हमेशा दु:खद है। जो भी तुम्हारी नींद तोड़ेगा, उसपर तुम नाराज़ होओगे, क्योंकि वह तुम्हें बेचैनी में डाल रहा है। इसलिए गुरु शुरु में तो कष्टदायी मालूम पड़ता है, दु:खदायी मालूम पड़ता है, परंतु बाद में परम सुखदायी है।
DON'T MISS THE GOLDEN OPPURTUNITY...............

SUSHREE SHREEDHARI DIDI'S LECTURE IN JAIPUR.

ALL ARE INVITED.

RADHEY-RADHEY.

Tuesday, August 21, 2012

हरि की कृपा जो चह गोविंद राधे।
तन मन धन गुरु सेवा में लगा दे।।

हरि के अधीन गुरु गोविंद राधे।
गुरु के अधीन हरि भेद ना बता दे।।

राधगोविंद गीत...........जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु द्वारा रचित दिव्य ग्रंथ से।
MY GURU (JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ) IS ALWAYS VERY CLOSE TO ME AND IS ALWAYS WITH ME DAY AND NIGHT.HE IS NEVER EVER AWAY FROM ME.
WHEN WE LOOK AT THE WAY SHRI MAHARAJJI SHOWERS GRACE,WE FEEL THAT HE IS ALL 'MERCIFUL RADHA RANI' IN A DIFFRENT FORM.
HE SAYS THAT HE HAS STOPPED NOTICING OTHER'S FAULTS AND HE HAS ABUNDANCE OF GRACE FOR EVERYBODY.THAT IS HIS REAL SELF.
***************RADHEY-RADHEY***************

GRACIOUS MAHARAJJI.

MY MAHARAJJI(JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ) IS THE EMBODIMENT OF GRACE.GRACE OUTSIDE,GRACE INSIDE,GRACE AND ONLY GRACE.
HE IS 'KRIPALU'!
न गुरु न चेला,कृपालु फिरे अकेला !

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...