Thursday, January 17, 2013





"ज़ीरो में गुणा करो चाहे ज़ीरो से, चाहे करोड़ से ,जवाब ज़ीरो ही आयेगा। ऐसे ही बिना मन के कोई भी इंद्रिय की कोई भी साधना लिखी नहीं जायेगी साधना मानी नहीं जायेगी। उसको एक्टिंग कहते हैं और भगवान से एक्टिंग करना, यह सबसे बुरी बात है। संसार में करो ठीक है। वह तो एक्टिंग की जगह है ही। वहाँ तो फ़ैक्ट करते हो और जहां फ़ैक्ट करना है वहाँ एक्टिंग करते हो ,लापरवाही करते हो,ये अच्छा नहीं है।
-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु."


O Lord, grant me this, that I may love you without the hope of reward - that I may love you unselfishly forever.


विपरीत वातावरण मिलने पर भी अन्त:करण विपरीत वातावरण से प्रभावित न हो वो साधक है।
.........श्री महाराजजी।
मैं तो जीना सिखाता हूँ मरना नहीं।
----श्री महाराजजी के श्रीमुख से।
मैं तो जीना सिखाता हूँ मरना नहीं।
 ----श्री महाराजजी के श्रीमुख से।
NAMES OF RADHAKRISHN HAVE ALL THE DIVINE POWERS.

..........SHRI MAHARAJJI.

 
 

मन को भगवान में लगाने का अभ्यास करो। आदत डालो। सोचो! यही शरीर है अरबपति का,यही शरीर है भिखारी का,वो भिखारी नंगे पाँव चलता है,जाड़े में,गर्मी में,बरसात में,और अरबपति को एयरकंडिशन (aircondition) चाहिये, अभ्यास है अपना-अपना। जैसा अभ्यास कर लो,वैसा बन जाओगे।
..........श्री महाराजजी।
मन को भगवान में लगाने का अभ्यास करो। आदत डालो। सोचो! यही शरीर है अरबपति का,यही शरीर है भिखारी का,वो भिखारी नंगे पाँव चलता है,जाड़े में,गर्मी में,बरसात में,और अरबपति को एयरकंडिशन (aircondition) चाहिये, अभ्यास है अपना-अपना। जैसा अभ्यास कर लो,वैसा बन जाओगे।
..........श्री महाराजजी।
My Beloved Lord! Make me so intoxicated with Your love that I may accept You as mine, without being concerned about whether or not You have accepted me.
My Beloved Lord! Make me so intoxicated with Your love that I may accept You as mine, without being concerned about whether or not You have accepted me.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...