This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Saturday, March 2, 2013
संसार में जिसे तुम बहुत अपना मानते हो........माँ , बाप , भाई, बीवी, दोस्त ....... अगर वो एक बार तुमसे कोई जरा सा झूठ बोल दे तो कितना फील करते हैं न आप लोग ??कितना अपमान लगता है न अपना की हमसे झूठ बोला इसने जबकि मैं इसे कितना अपना मानता हूँ......
और कभी सोचा है कि..........वो गुरु और भगवान .....जो तुम्हे सबसे ज्यादा अपना मानते है ...अरे मानना क्या है....... तुम्हारा वास्तव में माँ बाप भाई प्रियतम और है ही कौन .....सारे रिश्ते तो उन्हीं से हैं न ..... , वो तुम सब की तरफ हर पल इसी आशा में देखते रहते है कि अबकी बार ये सच ही बोल रहा है , कीर्तन में जो लाइन बोल रहा है वो सच ही बोल रहा है .....अबकी बार ये पूर्ण शरणागत हो जायेगा और मैं इसे प्रेम दान कर दूंगा .............पर होता क्या है ...........हम झूठ पे झूठ- झूठ पे झूठ-झूठ पे झूठ बोले चले जा रहे हैं आराम से ....कोई परवाह ही नहीं है ...वो हमे परखते ही रहे जा रहे हैं अनंत काल से ..... और हम झूठ बोले चले जा रहे हैं आराम से ......... संसार के रिश्तों को तो वास्तव में अपना मानते हैं और जो वास्तव में अपने हैं उनसे झूठ बोले जा रहे हैं.............. कमाल है ...कभी सोचा है कि कितना दुःख होता होगा उन्हें ?????
अपना अपमान अपमान है बस.........गुरु और भगवान का अपमान अपमान नहीं है क्या ? उन्हें कितना फील होता होगा जरा सोचो।
------- तुम्हारा कृपालु।
और कभी सोचा है कि..........वो गुरु और भगवान .....जो तुम्हे सबसे ज्यादा अपना मानते है ...अरे मानना क्या है....... तुम्हारा वास्तव में माँ बाप भाई प्रियतम और है ही कौन .....सारे रिश्ते तो उन्हीं से हैं न ..... , वो तुम सब की तरफ हर पल इसी आशा में देखते रहते है कि अबकी बार ये सच ही बोल रहा है , कीर्तन में जो लाइन बोल रहा है वो सच ही बोल रहा है .....अबकी बार ये पूर्ण शरणागत हो जायेगा और मैं इसे प्रेम दान कर दूंगा .............पर होता क्या है ...........हम झूठ पे झूठ- झूठ पे झूठ-झूठ पे झूठ बोले चले जा रहे हैं आराम से ....कोई परवाह ही नहीं है ...वो हमे परखते ही रहे जा रहे हैं अनंत काल से ..... और हम झूठ बोले चले जा रहे हैं आराम से ......... संसार के रिश्तों को तो वास्तव में अपना मानते हैं और जो वास्तव में अपने हैं उनसे झूठ बोले जा रहे हैं.............. कमाल है ...कभी सोचा है कि कितना दुःख होता होगा उन्हें ?????
अपना अपमान अपमान है बस.........गुरु और भगवान का अपमान अपमान नहीं है क्या ? उन्हें कितना फील होता होगा जरा सोचो।
------- तुम्हारा कृपालु।
'प्रेम मंदिर' का प्रथम प्राकट्य दिवस (जन्म दिवस) दिनाँक 7 एवं 8 मार्च,2013 को जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु की पावन उपस्थिति में दिव्य वृन्दावन धाम में धूमधाम से मनाया जायेगा। सभी साधक,मित्र गण सादर आमंत्रित हैं। राधे-राधे।
PREM MANDIR'S FIRST BIRTHDAY WILL BE CELEBRATED IN THE DIVINE PRESENCE OF JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ IN VRINDAVAN DHAM ON 7th AND 8th MARCH 2013.ALL DEVOTEES ARE INVITED FOR THIS DIVINE MOMENT.
RADHEY-RADHEY.
PREM MANDIR'S FIRST BIRTHDAY WILL BE CELEBRATED IN THE DIVINE PRESENCE OF JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ IN VRINDAVAN DHAM ON 7th AND 8th MARCH 2013.ALL DEVOTEES ARE INVITED FOR THIS DIVINE MOMENT.
RADHEY-RADHEY.
वे जरा अटपटे स्वभाव के हैं । छिप छिप कर देखते हैं एवं अब तुम जरा सा असावधान होकर संसारी वस्तु की आसक्ति मे बह जाते हो तब श्याम सुंदर को वेदना होती है की यह मुझे अपना मान कर भी गलत काम कर रहा है । मन श्यामसुंदर को दे देने के पश्चात ! उसमे संसारिक चाह न लाना चाहिए । यह श्यामसुंदर के लिए कष्टप्रद है ।
जीवन क्षणभंगुर है, अपने जीवन का क्षण क्षण हरि-गुरु के स्मरण में ही व्यतीत करो, अनावश्यक बातें करके समय बरबाद न करो। कुसंग से बचो, कम से कम लोगो से संबंध रखो, काम जितना जरूरी हो बस उतना बोलो।
जीवन क्षणभंगुर है, अपने जीवन का क्षण क्षण हरि-गुरु के स्मरण में ही व्यतीत करो, अनावश्यक बातें करके समय बरबाद न करो। कुसंग से बचो, कम से कम लोगो से संबंध रखो, काम जितना जरूरी हो बस उतना बोलो।
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...
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Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
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गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






