Monday, May 20, 2013

Renunciation does not mean abandonment of worldly objects; it is giving up the attachment to them.
----jagadguru shri kripalu ji maharaj.
Renunciation does not mean abandonment of worldly objects; it is giving up the attachment to them.
----jagadguru shri kripalu ji maharaj.


 


सकल सुमंगल धाम हैं, सतगुरु के चरणार l
चरण कमल में वंदना, बार बार नमस्कार ll

चरण कमल गुरुदेव के, जो जन हिय बसाए l
अगम अपार भव सिन्धु से, सहजे ही तर जाए ll
...

जीवों को लख कर दुखी, लिया प्रभु अवतार l
परमहंस के रूप में, प्रकटे या संसार ll

सदुपदेश सुनाय कर, सत्पथ रहे दिखाय l
माया काल के फंद से, रहे हैं जीव छुड़ाय ll

भक्ति पंथ दरसाय कर, किया अमित उपकार l
भवसागर में डूबते, लीन्हे जीव उबार ll

जो माने सतगुरु वचन, भ्रम संशय मिट जाए l
आधि व्याधि नाशे सकल, सुख में रहे समाय ll
भक्ति के हैं जगत में, दाता सतगुरुदेव l
ताते श्रद्धा भाव से, करो गुरु की सेव ll

सतगुरु बिन नहीं जीव का, परम हितैषी और l
सो सौभागी जीव है, पावे चरणन ठौर ll

परम पुरुष सतगुरु मिले, बड़े पुण्य परताप l
दर्शन करत ही मिटत हैं, पाप ताप संताप ll

नाम अमोलक बक्श कर, किया बहुत उपकार l
जो जन सुमिरे भाव से, पावे सुख अपार ll

भवसागर का पोत है, गुरु का साचा नाम l
ताते श्रद्धा भाव से, सुमिरो आठों याम ll

महिमा सतगुरुदेव की, अगम अनन्त अपार l
हारे शेष अरु शारदा, वेद न पावें पार ll

भवसागर गंभीर में, डूब रहा संसार.
सकल सुमंगल धाम हैं, सतगुरु के चरणार l
चरण कमल में वंदना, बार बार नमस्कार ll

चरण कमल गुरुदेव के, जो जन हिय बसाए l
अगम अपार भव सिन्धु से, सहजे ही तर जाए ll

जीवों को लख कर दुखी, लिया प्रभु अवतार l
परमहंस के रूप में, प्रकटे या संसार ll

सदुपदेश सुनाय कर, सत्पथ रहे दिखाय l
माया काल के फंद से, रहे हैं जीव छुड़ाय ll

भक्ति पंथ दरसाय कर, किया अमित उपकार l
भवसागर में डूबते, लीन्हे जीव उबार ll

जो माने सतगुरु वचन, भ्रम संशय मिट जाए l
आधि व्याधि नाशे सकल, सुख में रहे समाय ll
भक्ति के हैं जगत में, दाता सतगुरुदेव l
ताते श्रद्धा भाव से, करो गुरु की सेव ll

सतगुरु बिन नहीं जीव का, परम हितैषी और l
सो सौभागी जीव है, पावे चरणन ठौर ll

परम पुरुष सतगुरु मिले, बड़े पुण्य परताप l
दर्शन करत ही मिटत हैं, पाप ताप संताप ll

नाम अमोलक बक्श कर, किया बहुत उपकार l
जो जन सुमिरे भाव से, पावे सुख अपार ll

भवसागर का पोत है, गुरु का साचा नाम l
ताते श्रद्धा भाव से, सुमिरो आठों याम ll

महिमा सतगुरुदेव की, अगम अनन्त अपार l
हारे शेष अरु शारदा, वेद न पावें पार ll

भवसागर गंभीर में, डूब रहा संसार ........


 


If someone makes a mistake, others may get angry, but you must learn to subside your anger. Control it and stop it before it grows in your own mind.
-------SHRI MAHARAJJI.
If someone makes a mistake, others may get angry, but you must learn to subside your anger. Control it and stop it before it grows in your own mind.
-------SHRI MAHARAJJI.


 


श्रीहरि अंतःकरण शुद्धि होने के पश्चात ही प्राप्त होते है ,
' निर्मल मन जन सो मोहिं पावा। मोहिं कपट छल छिद्र न भावा।'
गुरु पतित जीव को अधम स्थिति से उबार कर उसे हरि तक पहुँचाने का श्रम करने के कारण अधिक महत्वपूर्ण है।
********जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु********
श्रीहरि अंतःकरण शुद्धि होने के पश्चात ही प्राप्त होते है ,
' निर्मल मन जन सो मोहिं पावा। मोहिं कपट छल छिद्र न भावा।'
गुरु पतित जीव को अधम स्थिति से उबार कर उसे हरि तक पहुँचाने का श्रम करने के कारण अधिक महत्वपूर्ण है।
********जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु********




Karmayoga means attachment of the mind to your Guru and God, and physical performance of worldly duties.
----jagadguru shri kripalu ji maharaj.
Karmayoga means attachment of the mind to your Guru and God, and physical performance of worldly duties.
----jagadguru shri kripalu ji maharaj.


 


Practise of devotion involves replacing desires for the world with desires for God.
संसार की कामना के स्थान पर भगवान् की कामना बनाना है। बड़ी सीधी सी बात है उसीका नाम भक्ति है।
-----jagadguru shri kripalu ji maharaj.
Practise of devotion involves replacing desires for the world with desires for God.
संसार की कामना के स्थान पर भगवान् की कामना बनाना है। बड़ी सीधी सी बात है उसीका नाम भक्ति है।
-----jagadguru shri kripalu ji maharaj.




Friday, May 17, 2013

The world can be fooled by external behaviour; but God is controlled only by true love.
........SHRI MAHARAJJI.
The world can be fooled by external behaviour; but God is controlled only by true love.
 ........SHRI MAHARAJJI.



    मन का अटैचमेंट किसमें करें?

    एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...