Monday, May 20, 2013

श्रीहरि अंतःकरण शुद्धि होने के पश्चात ही प्राप्त होते है ,
' निर्मल मन जन सो मोहिं पावा। मोहिं कपट छल छिद्र न भावा।'
गुरु पतित जीव को अधम स्थिति से उबार कर उसे हरि तक पहुँचाने का श्रम करने के कारण अधिक महत्वपूर्ण है।
********जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु********
श्रीहरि अंतःकरण शुद्धि होने के पश्चात ही प्राप्त होते है ,
' निर्मल मन जन सो मोहिं पावा। मोहिं कपट छल छिद्र न भावा।'
गुरु पतित जीव को अधम स्थिति से उबार कर उसे हरि तक पहुँचाने का श्रम करने के कारण अधिक महत्वपूर्ण है।
********जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु********




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