Friday, May 24, 2013

वे क्या हैं ? हम नहीं जान सकते हैं। यह तो केवल वही जान सकता है जिस पर वो कृपा करके बोध करा देते हैं। केवल इतना ही द्रढ़ विश्वास बनाये रखो कि वे ही हमारे सर्वस्व हैं। सर्वसमर्थ हैं , सर्वान्तर्यामी हैं और इतना ही नहीं वे तो हमारे बिल्कुल अपने हैं और सदा से हम पर अकारण कृपा करते आये हैं।
~~~~ जगद्गुरु श्री कृपालु जी.
भगवत्कृपा का सबसे पक्का प्रमाण , भगवज्जन मिलन है , कृपा से लाभ लेना तभी संभव है , जब इस कृपा को बार - बार चिंतन में लाया जाय । भगवज्जन का यदि दर्शन मात्र प्राप्त हो जाय तो बार - बार चिंतन कर आनन्द विभोर होना चाहिए । क्योंकि उनके दर्शन को पाने या दिलाने की सामर्थ्य किसी भी साधना में नहीं है । यदि दर्शन के अतिरिक्त और भी सामीप्य मिल जाय फिर तो बात ही क्या है। यदि उस अमूल्य निधि को पाकर भी साधारण भावना या चिन्तन रहा तो महान कृतघ्नता एवं महान दुर्भाग्य ही होगा , क्योंकि इससे अधिक हमें क्या पाना शेष है।
~~~जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~
भगवत्कृपा का सबसे पक्का प्रमाण , भगवज्जन मिलन है , कृपा से लाभ लेना तभी संभव है , जब इस कृपा को बार - बार चिंतन में लाया जाय । भगवज्जन का यदि दर्शन मात्र प्राप्त हो जाय तो बार - बार चिंतन कर आनन्द विभोर होना चाहिए । क्योंकि उनके दर्शन को पाने या दिलाने की सामर्थ्य किसी भी साधना में नहीं है । यदि दर्शन के अतिरिक्त और भी सामीप्य मिल जाय फिर तो बात ही क्या है। यदि उस अमूल्य निधि को पाकर भी साधारण भावना या चिन्तन रहा तो महान कृतघ्नता एवं महान दुर्भाग्य ही होगा , क्योंकि इससे अधिक हमें क्या पाना शेष है।
~~~~~~~~~जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~~~~~~
Just cry and ask for his vision and love and nothing else. Don’t pretend to be something – however you are, be like that. If you put on a show, then, then God will do a left and about turn from you. You have to become like an innocent child .
-------- Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj.
Just cry and ask for his vision and love and nothing else. Don’t pretend to be something – however you are, be like that. If you put on a show, then, then God will do a left and about turn from you. You have to become like an innocent child .
-------- Jagadguru Shree Kripaluji Maharaj.
भगवद विषय में मन लगाये रहो,ताकि मृत्युकाल में भी भगवान का स्मरण रहे।
........श्री महाराजजी।
भगवद विषय में मन लगाये रहो,ताकि मृत्युकाल में भी भगवान का स्मरण रहे।
........श्री महाराजजी।

हे प्रभु ! मैं तो सदा से ही माया से भ्रमित होकर आपसे विमुख होकर संसार में भटकता रहा। गुरु कृपा से मेरी मोह निद्रा टूटी। उनके इस उपकार के बदले में मैं कंगाल भला कौन सी वस्तु उन्हें अर्पित कर सकता हूँ। क्योंकि गुरु के द्वारा दिये गये ज्ञान के उस शब्द के बदले सम्पूर्ण विश्व की सम्पति भी उन्हें सौंप दी जाय तो भी ज्ञान का मूल्य नहीं चुकाया जा सकता। ज्ञान दिव्य है और सांसारिक पदार्थ मायिक हैं।
!! जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु जी !!
हे प्रभु ! मैं तो सदा से ही माया से भ्रमित होकर आपसे विमुख होकर संसार में भटकता रहा। गुरु कृपा से मेरी मोह निद्रा टूटी। उनके इस उपकार के बदले में मैं कंगाल भला कौन सी वस्तु उन्हें अर्पित कर सकता हूँ। क्योंकि गुरु के द्वारा दिये गये ज्ञान के उस शब्द के बदले सम्पूर्ण विश्व की सम्पति भी उन्हें सौंप दी जाय तो भी ज्ञान का मूल्य नहीं चुकाया जा सकता। ज्ञान दिव्य है और सांसारिक पदार्थ मायिक हैं।
!! जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु जी !!
One should remember that if a Saint accepts our service, it only shows his greatness, like a king accepting a gift of a few pennies from a beggar. The Saint does not benefit from our service, but nonetheless accepts our service because we benefit from getting the chance to serve.
----Swami Nikhilanand, disciple of Jagadguru Kripaluji Maharaj & sanyasi teacher of JKP Radha Madhav Dham.
One should remember that if a Saint accepts our service, it only shows his greatness, like a king accepting a gift of a few pennies from a beggar. The Saint does not benefit from our service, but nonetheless accepts our service because we benefit from getting the chance to serve.
----Swami Nikhilanand, disciple of Jagadguru Kripaluji Maharaj & sanyasi teacher of JKP Radha Madhav Dham.
जैसे संसार की बातें सोचते-सोचते व्यक्ति बड़ा संसारी बन जाता है,वैसे ही ईश्वर की बातें उनका चिंतन करने से उनके बारे में बार-बार सोचने से ईश्वर का भक्त बन सकता है।
जैसे संसार की बातें सोचते-सोचते व्यक्ति बड़ा संसारी बन जाता है,वैसे ही ईश्वर की बातें उनका चिंतन करने से उनके बारे में बार-बार सोचने से ईश्वर का भक्त बन सकता है।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...