This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Monday, July 1, 2013
श्री महाराजजी के श्रीमुख से:
"श्री महाराजजी के श्रीमुख से:
एक बात बड़ी इंपोर्टेंट| हरि, गुरु को अपने साथ ,सर्वत्र ,सर्वदा महसूस
करो। इसका अभ्यास करो। दस दिन ,बीस दिन, महीने, छ: महीने में यह अभ्यास
पक्का हो जायेगा कि हम अकेले नहीं हैं। हम जहां अपने को अकेला मानते हैं
वहीं पाप कर बैठते हैं - प्राइवेट| अरे, वेद कहता है, अगर तुम गुरु को न भी
मानो तो भगवान को तो मानो कि अंत:करण में वो नित्य हमारे साथ है, हमारे
आइडिया नोट कर रहा है। तो हरि-गुरु को अपने साथ अपना रक्षक मानो। यह फीलिंग
हो - हम अकेले नहीं हैं,सदा वे हमारे साथ है।गलत काम न करें ,गलत चिंतन न
करें । सावधानी आयेगी तो अपराध से बचेंगे।"
एक बात बड़ी इंपोर्टेंट| हरि, गुरु को अपने साथ ,सर्वत्र ,सर्वदा महसूस करो। इसका अभ्यास करो। दस दिन ,बीस दिन, महीने, छ: महीने में यह अभ्यास पक्का हो जायेगा कि हम अकेले नहीं हैं। हम जहां अपने को अकेला मानते हैं वहीं पाप कर बैठते हैं - प्राइवेट| अरे, वेद कहता है, अगर तुम गुरु को न भी मानो तो भगवान को तो मानो कि अंत:करण में वो नित्य हमारे साथ है, हमारे आइडिया नोट कर रहा है। तो हरि-गुरु को अपने साथ अपना रक्षक मानो। यह फीलिंग हो - हम अकेले नहीं हैं,सदा वे हमारे साथ है।गलत काम न करें ,गलत चिंतन न करें । सावधानी आयेगी तो अपराध से बचेंगे।"
'JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ'..............
Our
guruvar 'JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ'lovingly called 'Shri
Maharajji' by devotees is grace and kindness personified.It means grace
is all around,both inside and outside.This is how he truly is.the word
'kripalu' itself means one who showers grace and kindness all around.One
may come to him with good intention or bad he will impart his grace on
all regardless of their intention.It seems the whole existence of
Guruvar is made of Grace.
Every moment of life whether he is sleeping or awake,he is bestowing his grace on all living beings.
The day we accept him as hundred percent 'Kripalu','the embodiment of Grace',we will attain our goal.
*****************RADHEY--RADHE Y********************
Every moment of life whether he is sleeping or awake,he is bestowing his grace on all living beings.
The day we accept him as hundred percent 'Kripalu','the embodiment of Grace',we will attain our goal.
*****************RADHEY--RADHE
ऐसे है हमारे महाराजजी...........
ऐसे है हमारे महाराजजी...........
कैसी तेज गति है उनकी एक क्षण भी अपना व्यर्थ नहीं जाने देते हैं। सर्दी
गर्मी बरसात आँधी तूफान कैसा भी मौसम हो वे सदैव गतिशील ही रहते हैं। उनकी
दिनचर्या में कोई अंतर नहीं होता कैसे भी परिस्थिति हो कैसा भी उनका
स्वास्थ्य हो, अपने सुख को तो भूल ही गये हैं ,सदैव अपने शरणागत जीवों का
सुख का ही चिंतन करते रहते हैं।
कैसी तेज गति है उनकी एक क्षण भी अपना व्यर्थ नहीं जाने देते हैं। सर्दी गर्मी बरसात आँधी तूफान कैसा भी मौसम हो वे सदैव गतिशील ही रहते हैं। उनकी दिनचर्या में कोई अंतर नहीं होता कैसे भी परिस्थिति हो कैसा भी उनका स्वास्थ्य हो, अपने सुख को तो भूल ही गये हैं ,सदैव अपने शरणागत जीवों का सुख का ही चिंतन करते रहते हैं।
JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ SAYS:
सत्य अहिंसा आदि मन ! बिन हरिभजन न पाय |
जल ते घृत निकले नहीं , कोटिन करिय उपाय ||३५||
भावार्थ – सत्य अहिंसादि दैविगुण केवल श्रीकृष्ण भक्ति से ही मिल सकते हैं
| जैसे पानी मथने से घी नहीं निकल सकता | ऐसे ही अन्य करोड़ों उपायों से
दैविगुण नहीं मिलते |
(भक्ति शतक )
जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज द्वारा रचित |
जल ते घृत निकले नहीं , कोटिन करिय उपाय ||३५||
भावार्थ – सत्य अहिंसादि दैविगुण केवल श्रीकृष्ण भक्ति से ही मिल सकते हैं | जैसे पानी मथने से घी नहीं निकल सकता | ऐसे ही अन्य करोड़ों उपायों से दैविगुण नहीं मिलते |
(भक्ति शतक )
जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज द्वारा रचित |
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गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






