Monday, July 1, 2013

(भक्ति शतक ) जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज द्वारा रचित |

जैसे प्राकृत देह की , आत्मा ‘जीव’ बखान |
ऐसे ही जीव की , आत्मा ‘श्याम’ सुजान ||३४||

भावार्थ – जिस प्रकार पाँच भौतिक देह की आत्मा जीव है | ऐसे ही जीव रूप देह की आत्मा श्री कृष्ण हैं |

(भक्ति शतक )
जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज द्वारा रचित |

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