This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Monday, July 8, 2013
"भगवान
और महापुरुष की कोई बात समझ में आ जाती है, यह आश्चर्य है। नहीं आती,यह
स्वाभाविक है,क्योकि हम मायिक हैं, और महापुरुष अमायिक। यदि तुम किसी
महापुरुष को तभी मानो जब उसकी बातें तुम्हें समझ में आ जाये, तो शास्त्र
कहते हैं, इस पैमाने से तुम जहाँ हो ,उससे और पीछे खिसकते जाओगे,क्योकि
ईश्वरीय जगत के बड़े ही सूक्ष्म और रहस्य के कानून हैं। उन्हे केवल उनकी
"गवर्नमेंट" वाले ही जानते हैं।
-----जगद्गुरुत्तम श्री कृपालुजी महाराज।"
-----जगद्गुरुत्तम श्री कृपालुजी महाराज।"
"जिस
वातावरण से तुमको नुकसान होने वाला है,उस वातावरण में तुम क्यों जाते हों।
शास्त्रों में लिखा है- धधकते अंगारों के बीच लोहे के पिंजरे में प्राण
त्याग देना अच्छा है, बजाय इसके कि गलत atmosphere में पहुँच जाना।
भगवदप्राप्ति के एक सेकंड पहले तक पग पग पर खतरा है। शास्त्रों का ज्ञाता
जितेंद्रिय धर्मात्मा अजामिल भी एक क्षण के कुसंग से पापियों की example बन
गया। अनंत जन्मों का गलत अभ्यास है इसलिए बिगड़ना जल्दी हो जाता है और बनना
देर में होता है। बिगड़ने की बहुत लंबी प्रैक्टिस है।
-----जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।"
-----जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।"
Friday, July 5, 2013
देखिये
! संसार में चौरासी लाख प्रकार के शरीर हैं उसमें केवल मनुष्य शरीर ऐसा
है जिसमें हम साधना के द्वारा दुःखों से छुटकारा पाकर आनंद प्राप्त कर सकते
हैं। बहुत बार आप लोगों को बताया गया है कि इसलिये देवता भी इस मानव देह
को चाहते हैं । सात अरब आदमियों में सात करोड़ भी ऐसे नहीं हैं जिनके ऊपर
भगवान् की ऐसी कृपा हो कि कोई बताने बाला सही - सही ज्ञान करा दे कि क्या
करने से तुम्हारे दुःख चले जायेंगे और आनंद मिल जायेगा। और जिन लोगों को ये
सौभाग्य प्राप्त हो चुका है , ये जान चुके हैं किसी महापुरुष से वे लोग भी
फिर चौरासी लाख का हिसाब बैठा रहे हैं। क्यों ? उत्तर है , लापरवाही ।
----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
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