Saturday, August 24, 2013

गुरु करे उसे जिसे मिले श्याम श्यामा !
कान फुंक्वाने ते ना बने कभु कामा !!
श्याम श्यामा कहें गुरु भजो आठो यामा !
गुरु कहे आठो याम भजो श्याम श्यामा !!
----श्री महाराज जी।

Monday, August 19, 2013

आज नहीं कल कर लेंगे। बस ये कर लें,बस वो कर लें,फिर भजन करेंगे। इस प्रकार अनंत जन्म गँवा दिये लेकिन वह आज और कल न आ सका।
.......श्री महाराजजी।
जो करना है आज़ ही कर लो,कल का पक्का नहीं है। जब आश्रम आते हो या जब साधना करते हो तो मायिक चीजों का घर वालों का चिंतन क्यूँ करते हो? मान लो ना की सब मर गये। कोई नहीं है हमारा बस हरि-गुरु ही हैं हमारे सबकुछ।
..........श्री महाराजजी।
जब जीव और ईश्वर का मिलन हो जाता है तब उन दोनों के मध्य में रहने वाली माया प्रथक हो जाती है।अब ईश्वर जीव का प्रेरक हो जाता है।
.......श्री महाराजजी।
If someone makes a mistake, others may get angry, but you must learn to subside your anger. Control it and stop it before it grows in your own mind.
-------SHRI MAHARAJJI.
भगवद प्राप्ति से पूर्व किसी भी जीव को यह दावा करने का अधिकार नहीं है कि कुसंग मेरा कुछ भी नहीं कर सकता।
........श्री महाराजजी।
जितने अपराध होते हैं सब privacy के कारण होते हैं,और privacy कब करेगा आदमी? जब हृदय में श्याम सुंदर को नहीं समझेगा, भूल जायेगा।
......श्री महाराजजी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...