Saturday, August 24, 2013

सबहिं मानप्रद आपु अमानी।
सबको मान दो, स्वयं मान न चाहो,ऐसा होता है दीन।
आज्ञा सम न सुसाहिब सेवा।
सेवा का अभिप्राय है अपने स्वामी को सुख देने का लक्ष्य रखकर स्वामी की आज्ञानुसार सेवा करना। उनकी आज्ञापालन ही सेवा है,अपनी इच्छानुसार 'सेवा' सेवा नहीं।
हमारी अलबेली सरकार।
रसिक रँगीली गुन गर्वीली,रसिकन की रिझवार।।
DIVINE PICTURES OF PREM MANDIR IN VRINDAVAN DHAM.
Devotion is indispensable in all the paths. No righteous action or knowledge can lead to the attainment of God without devotio.
----SHRI MAHARAJ JI.
भगवान् और गुरु वैसे ही एक हैं जैसे पिता तथा माता का पति ! बोलने में अलग अलग शब्द हैं लेकिन अर्थ एक ही है !
--------जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु जी.
SHRI KRISHNA JANMASHTAMI - 28TH Aug,2013
@ PREM MANDIR, VRINDAVAN DHAM.

CELEBRATE SHRI KRISHNA JANMASHTAMI WITH JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.ALL ARE INVITED.RADHEY-RADHEY.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...