This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Sunday, September 1, 2013
शास्त्र गुरु वचनों में गोविंद राधे।
पूर्ण विश्वास ही है श्रद्धा बता दे।।
शास्त्र-वेद और गुरु के वचन पर पूर्ण विश्वास- इसका नाम श्रद्धा है। श्रद्धा माने- दृढ़ विश्वास।
जैसे physical विषय में मरीज़ कुछ नहीं जानता,वह डॉ. पर सेंट-परसेंट
विश्वास,श्रद्धा करता है, ऐसे ही spiritual side में हम कुछ नहीं जानते
इसलिए spiritual man रूपी doctor की बात सेंट-परसेंट मानना ही होगा। ये
श्रद्धा है।
-------श्री कृपालु महाप्रभु।
पूर्ण विश्वास ही है श्रद्धा बता दे।।
शास्त्र-वेद और गुरु के वचन पर पूर्ण विश्वास- इसका नाम श्रद्धा है। श्रद्धा माने- दृढ़ विश्वास।
जैसे physical विषय में मरीज़ कुछ नहीं जानता,वह डॉ. पर सेंट-परसेंट विश्वास,श्रद्धा करता है, ऐसे ही spiritual side में हम कुछ नहीं जानते इसलिए spiritual man रूपी doctor की बात सेंट-परसेंट मानना ही होगा। ये श्रद्धा है।
-------श्री कृपालु महाप्रभु।
JAGADGURU
SHRI KRIPALUJI MAHARAJ HAS BEEN SHOWERING 'BRAJ RAS' SINCE 1938. FOR
THE GOOD OF THE SOULS, HE HAS REVEALED A RECONCILED AND UNIFIED THEORY
OF ALL THE BHARTIYA SCRIPTURES WHICH WAS PROPOUNDED BY PREVIOUS
JAGADGURUS AND ACHARYAS IN VARIOUS WAYS,AND ESTABLISHED A
SINGLE,SURE,SIMPLE,AND POTENT PATH OF DEVOTION TO GOD THAT COULD BE
FOLLOWED BY EVERYONE DESIRING TO EXPERIENCE THE SUPREME FORM OF DIVINE
LOVE.
JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ HAS REJUVENATED AND
RE-ESTABLISHED THE DEVOTIONAL PARAMPARA OF 'RAGANUGA BHAKTI' WHICH WAS
INTRODUCED BY SHREE CHAITANYA MAHAPRABHU JI,AND HAS GIVEN IT A REFINED
FORM THAT COULD BE FOLLOWED BY THE DEVOTEES OF THE WORLD,FOREVER.
JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ HAS REJUVENATED AND RE-ESTABLISHED THE DEVOTIONAL PARAMPARA OF 'RAGANUGA BHAKTI' WHICH WAS INTRODUCED BY SHREE CHAITANYA MAHAPRABHU JI,AND HAS GIVEN IT A REFINED FORM THAT COULD BE FOLLOWED BY THE DEVOTEES OF THE WORLD,FOREVER.
हास
- परिहास में भी शास्त्रीय सिद्धान्तों का निरूपण करके प्रत्येक जाति ,
प्रत्येक सम्प्रदाय, बाल , युवा , वृद्ध सभी आयु तथा शिक्षित - अशिक्षित ,
मूर्ख - विद्वान् सभी को जिन्होंने प्रेम पाश में बांधकर विश्व बन्धुत्व का
क्रियात्मक रूप स्थापित किया है ,
ऐसे सहज सनेही सुधासिंधु ,
श्री गुरुवर के चरणों में कोटि - कोटि प्रणाम !
ऐसे सहज सनेही सुधासिंधु ,
श्री गुरुवर के चरणों में कोटि - कोटि प्रणाम !
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Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
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