This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Saturday, March 15, 2014
करोड़ों
कल्प चौरासी लाख में घूमना पड़ेगा। अनन्त जन्म घूम चुके , आगे भी घूमना
पड़ेगा। हमारी जिद्द नहीं काम देगी। ए जी ---हम झगड़े में नहीं पड़ते। जो
मन में आता है वो करते हैं। ठीक है।।
जीव कर्म करने में स्वतन्त्र है। मन में आये सो करते जाओ लेकिन फल भोगने में परतंत्र है। फल भोगना पड़ेगा , भगवान् के अनुशासन के अनुसार। वहाँ नहीं चलेगी।
हम नहीं भोगते जी ......... न --जो जस करइ सो तस फल चाखा।
इसलिए सावधान होकर उधार न कर के हम लोगों को साधना में तत्पर हो करके अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए।
-----जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु जी।
जीव कर्म करने में स्वतन्त्र है। मन में आये सो करते जाओ लेकिन फल भोगने में परतंत्र है। फल भोगना पड़ेगा , भगवान् के अनुशासन के अनुसार। वहाँ नहीं चलेगी।
हम नहीं भोगते जी ......... न --जो जस करइ सो तस फल चाखा।
इसलिए सावधान होकर उधार न कर के हम लोगों को साधना में तत्पर हो करके अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए।
-----जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु जी।
कोई
महापुरुष हो , चाहे राक्षस हो। अपने मन में दूसरे के प्रति हमेशा अच्छी
भावना होनी चाहिये। जिससे अच्छे विचार अंतःकरण में आवें। वो जो है, वो तो
रहेगा ही। वो राक्षस होगा, तो राक्षस रहेगा। महापुरुष होगा तो महापुरुष
रहेगा। हम अपने अंदर अगर दुर्भावना लाते हैं तो हमने तो अपना अंतःकरण
बिगाड़ लिया। अब भगवान् जो थोड़ा पैर रखे आने के लिए एबाउट टर्न चल दिये।
वो कहते हैं - क्योंकि तुम तो औरों को बुलाते हो , इसलिये मैं नहीं रहता
ऐसे घर में।
!! जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज !!
!! जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज !!
Friday, March 14, 2014
"हे! कृपामयी राधे.....
मेरे ऊपर भी तो कृपा करो, मुझ पर कृपा करने से तुम्हारे कृपा के भंडार मे कोई कमी नहीं आएगी अपितु तुम्हारे यश का ही विस्तार होगा।
हे! राधे, तुम्हारा तन, मन, प्राण सब कृपा द्वारा ही निर्मित है।
तुम तो कृपा का ही एक दूसरा स्वरूप हो।
राधे ! कृपा करने के अतिरिक्त अन्य कोई कार्य तुम नहीं कर सकती कृपा किए बिना तुमसे रहा भी नहीं जाता, जिस प्रकार संसार मे मछ्ली जल से ही जीवित रहती है उसी प्रकार कृपा ही तुम्हारा जीवन है अर्थात तुमने जीवन धारण ही कृपा करने के लिए किया है संसार मे सुर, नर, मुनि भी कृपा करते देखे जाते हैं परंतु वे बिना कारण के कृपा नहीं कर सकते।
.......जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
मेरे ऊपर भी तो कृपा करो, मुझ पर कृपा करने से तुम्हारे कृपा के भंडार मे कोई कमी नहीं आएगी अपितु तुम्हारे यश का ही विस्तार होगा।
हे! राधे, तुम्हारा तन, मन, प्राण सब कृपा द्वारा ही निर्मित है।
तुम तो कृपा का ही एक दूसरा स्वरूप हो।
राधे ! कृपा करने के अतिरिक्त अन्य कोई कार्य तुम नहीं कर सकती कृपा किए बिना तुमसे रहा भी नहीं जाता, जिस प्रकार संसार मे मछ्ली जल से ही जीवित रहती है उसी प्रकार कृपा ही तुम्हारा जीवन है अर्थात तुमने जीवन धारण ही कृपा करने के लिए किया है संसार मे सुर, नर, मुनि भी कृपा करते देखे जाते हैं परंतु वे बिना कारण के कृपा नहीं कर सकते।
.......जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
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