Friday, March 14, 2014

सहनशील बनो तथा कभी भी किसी बात को फील (feel) न करो ! सदा अपने अन्दर झाँको ! दूसरा चाहे कुछ भी करे ! तुम्हें तो बस अपने से ही मतलब रखना चाहिए ! यदि कोई कमायेगा तो भी अपने लिए , गँवायेगा तो भी अपने लिये।
-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...