Tuesday, March 25, 2014

A devotee prays, “May there always be sorrow and suffering in my life, so that I may never forget God!” “Cursed be the happiness that makes me forget my Lord; blessed be the sorrows that make me remember Him.” Strive to become a true lover of God by not objecting to His will and by embracing His mysterious ways.
----JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.

अपनापन रखना मेरे घनश्याम।
Apanapan rakhna mere ghanshyam.

O my Shyam! Please consider me as your own.
......SHRI MAHARAJ JI.

विश्वास बढ़ाओं।
तदर्थ बार - बार चिन्तन आवश्यक है। चिन्तन गुरु एवं इष्टदेव की कृपा का करना है। कृपा केवल दर्शन मात्र की ही पर्याप्त है। एक क्षण भी कृपा के विपरीत न सोचो।
कभी भी अकेले न रहो। सदा उन्हें अपने साथ मानो। रोम - रोम में प्रियतम के स्पर्श का चिन्तन करो।
करके देखो।
………जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।

Monday, March 24, 2014

जीवन वही है जो हरि-गुरु सेवा में ही लगा रहे।
-----श्री महाराजजी।
हरि गुरु की सेवा से, हरि गुरु के निरंतर स्मरण से हमारा अन्तः करण शुद्ध होगा ।
ये प्रतिज्ञा कर लो सब लोग की जब आपस मे मिलो तो केवल भगवद् चर्चा करो और यदि दूसरा न करे तो वहाँ से तुरंत चले जाओ, हट जाओ । इस प्रकार कुसंग से बचो । जो कमाइए उसको लॉक करके रखिए, लापरवाही मत कीजिये ।
.......जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

Time is one of our most precious resources. It is flying, and this golden opportunity is slipping out of our hands. Use every moment wisely.
........SHRI MAHARAJJI.

भगवननाम ही वास्तविक ख़जाना है।
......श्री महाराजजी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...