Tuesday, May 6, 2014

जिसने तेरी आँखों की शरारत नहीं देखी .......!
वो लाख़ कहे पर उसने मोहब्बत नहीं देखी .....!!
राधे - राधे.

भगवान् का स्मरण करके उनके मिलन की परम व्याकुलता बढ़ा करके जिसके आँखों से आँसू आयेंगे, उनके स्मरण से शरीर में रोमांच, कम्पादि होंगे तभी अंतःकरण शुद्ध होगा। ये धर्म - कर्म से अंतःकरण शुद्ध नहीं होता।
.......जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

' हे श्रीकृष्ण ! यदि दीनता से ही तुम कृपा करते हो तो वह तो मेरे पास थोड़ा भी नहीं है ! अतः पहले ऐसी कृपा करो कि दीन भाव युक्त बनूँ ! ' ऐसा कह कर आँसू बहाओ ! यह करना पड़ेगा ! मानवदेह क्षणिक है ! जल्दी करो ! पता नहीं कब टिकिट कट जाय !
यह मेरा नम्र निवेदन सभी से है !
{जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज}

Monday, May 5, 2014

हास - परिहास में भी शास्त्रीय सिद्धान्तों का निरूपण करके प्रत्येक जाति , प्रत्येक सम्प्रदाय, बाल , युवा , वृद्ध सभी आयु तथा शिक्षित - अशिक्षित , मूर्ख - विद्वान् सभी को जिन्होंने प्रेम पाश में बांधकर विश्व बन्धुत्व का क्रियात्मक रूप स्थापित किया है ,
ऐसे सहज सनेही सुधासिंधु ,श्री गुरुवर के चरणों में कोटि - कोटि प्रणाम !

जो समझा दे श्रुति सार, उर भरा प्रेम रिझवार।
सोई है सद्गुरु सरकार, गुरु सोइ 'कृपालु' सरकार।।

हे विराट युग पुरूष कृपानिधि ,ज्ञान भक्ति रस के दातार।
सगुण अगुण परतत्व 'कृपालु', जीवन है तुम पर बलिहार।।
हे सर्वज्ञ सर्वसुख सागर , पतित जनन के तारनहार।
दीनबंधु हे परम हितैषी , श्रद्धा सुमन करहुँ स्वीकार।।

Sunday, May 4, 2014

धरो मन गौर चरण को ध्यान।
जिन चरनन को अपने हिय में धारत सुन्दर श्याम।।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...