This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Saturday, May 10, 2014
सखी ! इन कानन का न करी |
प्रथम मुरलिधर मुरलि तान ते, कानन कान भरी |
पुनि कानन ने कान भरे इन, नैनन घरी घरी |
तब इन नैनन हरि नैनन ते, इक दिन जाय लरी |
गयो हार अब इन नैनन, उन, नैनन बान परी |
लगतहिं बान ‘कृपालु’ अवनि गिरि, सुधि भूली सिगरी ||
प्रथम मुरलिधर मुरलि तान ते, कानन कान भरी |
पुनि कानन ने कान भरे इन, नैनन घरी घरी |
तब इन नैनन हरि नैनन ते, इक दिन जाय लरी |
गयो हार अब इन नैनन, उन, नैनन बान परी |
लगतहिं बान ‘कृपालु’ अवनि गिरि, सुधि भूली सिगरी ||
भावार्थ – एक विरहिणी कहती है कि अरी सखी ! मेरे इन कानों ने क्या
नहीं किया | सर्वप्रथम मुरलीधर ने अपनी मधुर मुरली की तान से इन कानों के
कान भरे | पुन: इन कानों ने आँखों को बहकाया | एक दिन यह आँखें जाकर
श्यामसुन्दर से लड़ गयीं | परिणाम यह हुआ कि श्यामसुन्दर के नैनों के बाणों
से मैं घायल हो गयी | अब इन्हें संसार की बिल्कुल भी सुधि नहीं है | ‘श्री
कृपालु जी’ कहते हैं कि उन्हीं के कारण अब हमारे प्राणों पर भी बीती है |
हे श्यामसुन्दर ! अब मुझे किसी प्रकार बचा लो |
( प्रेम रस मदिरा विरह – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति
( प्रेम रस मदिरा विरह – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति
Grace
and God are one, just like the Divine Bliss and God are one. It means
that God Himself is the form of Grace and God Himself is the form of the
Bliss. Grace is such a power of God with which all of His absolute and
unlimited virtues are revealed. It is the Grace of God that makes a
Saint experience His absolute Bliss, beauty and love; and it is the same
power of Grace through which a Saint imparts God realization to his
disciple. God and Grace are one and the same. So wherever God is, Grace
is there.
.......JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.
.......JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.
Subscribe to:
Posts (Atom)
मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...
-
Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
-
गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
-
ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






