Saturday, May 10, 2014

संसार की भक्ति करते रहे हैं अब तक,लेकिन अब भगवान की ही भक्ति करनी है,क्योंकि संसार में आत्मा का सुख नहीं है,भगवान में ही है।
...........श्री महाराजजी।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

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