Monday, May 19, 2014

साधक को किसी से द्वेष भाव नहीं रखना चाहिये ! यदि हो जाये तो बार - बार उसका चिंतन न करे ! यदि है भी तो कथन में उसके सामने प्रकट न करे ! संसार में सब स्वार्थी हैं अतः इस विषय को लेकर किसी से द्वेष होना गलत है !
.........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

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