Wednesday, May 21, 2014

दूसरे के दोष देखना और अपने आप को अच्छा कहलवाना। यही अभ्यास हो गया है हम लोगों का,यह सबसे बड़ी बाधा है ईश्वरीय शरणागति में।
...........श्री महाराज जी।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...