Thursday, May 15, 2014

जिस कर्म से श्रीकृष्ण की सेवा हो एवं जिस ज्ञान से श्री कृष्ण प्रेम बढ़े ! वही कर्म है एवं वही सही ज्ञान है।
:::::::::::जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

Tuesday, May 13, 2014

उधार करते-करते अनंत जनम बीत गये, देव दुर्लभ मानव देह भी कूकर-शूकर की ही भाँति बस भरण-पोषण में बीत रहा है।
.......श्री महाराज जी।

परमपूज्य जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की प्रचारिका सुश्री श्रीधरी दीदी जी के सान्निध्य में जयपुर(राजस्थान) में त्रि-दिवसीय भक्ति-योग साधना शिविर का आयोजन।
रजिस्ट्रेशन हेतु कृपया ईमेल पते पर सम्पर्क करें। sharadgupta40@yahoo.com.

राधे-राधे।
THREE DAY'S BHAKTI-YOG SADHNA SHIVIR BY SUSHRI SHREEDHARI DIDIJI(preacher of JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ) IN JAIPUR.FOR REGISTRATION: CONTACT: sharadgupta40@yahoo.com.
RADHEY-RADHEY.

ये संसार सारहीन है इसमें इतना ही सार है कि मानव शरीर पा कर हरि एवं गुरु से सच्चा प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो जाय।
.......श्री महाराज जी।

जब अनंत जीवों को वो अपना चुकें हैं फिर शंका कैसी ?
फिर मेरी बात का भी तो विश्वाश करना चाहिये। सच कह रहा हूँ कि बिल्कुल तुम्हारे पास खड़े होकर मुस्कराते हुए तुम्हारे प्यार को सदा देखते हैं। बताओ वह जीव कितना बड़ा भाग्यवान है जिसको श्यामसुन्दर सदा देखें।

------श्री कृपालु जी महाप्रभु।

Monday, May 12, 2014

दो रास्ते हैं......या तो रसिक जन ,वास्तविक संत के बताये हुए रास्ते पे चल लो और अपने परम चरम लक्ष्य की और अग्रसर हो,या थपेड़े खाकर संसार के झूठ में हिलोरे खाते हुए मानव जीवन व्यर्थ गवा दो।
जय श्री राधे।

अनादिकाल से साधना की असफलता के पीछे एक ही अवगुण रहा है.......
हरि गुरु का स्मरण त्याग कर मन संसार में लगाना।
.......श्री महाराज जी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...