हम
भगवान् के आगे , उनको सामने खड़ा करके, रो कर उनके दर्शन , उनका प्रेम
माँगे बस यही भक्ति। रो कर अकड़ कर नहीं , जैसे कोई पानी में डूबने लगता है
तो वो कितनी व्याकुलता में हाथ पैर उपर करता है , तैरना नहीं जानता
है।जैसे मछली को बाहर डाल दो , कैसे तड़पती है पानी के लिये । ऐसे ही
श्यामसुंदर के मिलन के लिये हमको तड़पना होगा। इस जन्म में अथवा हजार जन्म
बाद फिर। और ये करना पड़ेगा।
-----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
-----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।






![एक - एक क्षण में लोग मर रहें हैं। यमालय की ओर जा रहे हैं। लेकिन जो लोग लाशें जलाने या फूँकने जाते हैं, वे समझते हैं - हमको थोड़े ही मरना है अभी। वह पूरे जीवन की प्लानिंग { planning } कर रहा है इससे बड़ा कोई आश्चर्य हो सकता है। मुर्खता का अंतिम स्वरूप है यह।
मनुष्यों----- तुमको मनुष्य शरीर मिल गया है, इसका लाभ उठा लो। यह करोड़ों जन्म में मिला है।
जन्मान्तर सहस्त्रैस्तुमनुष्यत्वं हि दुर्लभम।
{ महाभारत }
जल्दी अपनी काम बना लो। भगवान् के शरणापन्न हो जाओ। संत के द्वारा समझकर अपना कल्याण करो।
वेद कहता है ----
इह चेदशकद् बौद्धम प्राक शरीरस्य विस्त्रसः
ततः सर्गेषु लोकेषु शरीरत्वाय कल्पते।
{ कठोपनिषद }
ऐ मनुष्यों --------ये मनुष्य शरीर पाकर ईश्वर भक्ति करके अपना लक्ष्य प्राप्त कर लो। नहीं तो 'सर्गेषु' [ करोड़ों ] बार चौरासी लाख योनियों में घूमना पड़ेगा।
--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।](https://fbcdn-sphotos-g-a.akamaihd.net/hphotos-ak-xpf1/t1.0-9/s526x296/10443421_636183436472509_5299514640625990216_n.jpg)