Wednesday, June 4, 2014

एक दिन अगर निकल जाये ऐसा कि न किसी के प्रति 'द्वेष' अंदर आने पावे , न किसी के प्रति 'राग' आने पावे , समझो वो तुम्हारा जीवन का असली दिन है ।और आ जाये कभी अभ्यास के कारण तो फील ( feel ) करो ।फीलिंग ( feeling) से दोष कम होते हैं।
--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...