Sunday, June 15, 2014

जिन्होंने अपना समस्त जीवन जीव कल्याणार्थ समर्पित कर दिया , जो हर पल जीवों को प्रेम रस परिप्लुत करने के लिए लालायित रहते हैं ,
ऐसे प्रेमानन्द में निमग्न प्रेममूर्ति श्री कृपालु जी महाप्रभु को कोटि कोटि प्रणाम !

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...