Saturday, June 7, 2014

भगवान् से कोई जीव किसी प्रकार का लाभ नहीं उठा सकता ! जैसे समुद्र का खारा जल किसी प्राणी की प्यास नहीं बुझाता परन्तु वही समुद्र का जल जब बादल बरसाता है तो सम्पूर्ण जगत तृप्त हो जाता है ! इसी प्रकार संतों द्वारा ही भगवान् की दिव्य महिमा का ज्ञान प्राप्त करके जीव भगवान् का आनन्द प्राप्त कर लेता है !
-------------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु .

सेवा में बहुत सी बारीक बातें हैं,एक तो यह कि सेवा करके सेवाभिमान न आने पावे,और दूसरा ये कि सेवा को छुपाने की ही भावना रहे सदा,कोई जानने न पावे।
.......श्री महाराज जी।

We are the Soul. GOD & GURU are our only relatives. This world is not our relative. Once you attain this knowledge firmly, you will start progressing on the path of your welfare.
----- JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.

I AM ALWAYS THERE WITH YOU.
SHRI MAHARAJJI.

ले चलो कश्ती भँवर में 'श्याम' तुम अपनी,यों किनारे डूबने को दिल नहीं करता.......!
राधे-राधे।

Friday, June 6, 2014

माया का लड़का 'मन'; तुम भगवान के लड़के 'जीव' और ये जड़ माया का लड़का तुमको नचा रहा है और तुम अपने आपको बुद्धिमान कहते हो।
.......श्री महाराज जी।

ले चलो कश्ती भँवर में 'श्याम' तुम अपनी,यों किनारे डूबने को दिल नहीं करता.......!
राधे-राधे।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...